ग्रामीण उत्तराखंड के विद्यार्थियों को विश्व के अग्रणी वैज्ञानिकों से सीखने का मिलेगा अवसर, महाविद्यालय रानीखेत बना नॉलेज पार्टनर

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क्वांटम भौतिकी, चेतना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर 8 से 15 अगस्त तक अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान श्रृंखला; राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत बना नॉलेज पार्टनर

रानीखेत। उत्तराखंड के ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों तथा विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों को विश्व के अग्रणी वैज्ञानिकों और विद्वानों के विचारों से सीधे जुड़ने का अवसर मिलने जा रहा है। “क्वांटा, माइंड एंड एजेंसी (Quanta, Mind & Agency)” विषय पर आयोजित होने वाली एक अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन व्याख्यान श्रृंखला 8 से 15 अगस्त, 2026 तक आयोजित की जाएगी।

इस व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन क्यूएफओएल (QFOL) रिसर्च ग्रुप, भक्तिवेदांत इंस्टीट्यूट, कोलकाता द्वारा संस्थान की स्वर्ण जयंती (50 वर्ष) के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। इस वैश्विक शैक्षणिक पहल में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है, जिसके माध्यम से उत्तराखंड के ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों तक विश्वस्तरीय वैज्ञानिक संवाद पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।

व्याख्यान श्रृंखला में विश्व के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और दार्शनिक विचारक भाग लेंगे। इनमें डॉ. एरिक कैवलकांटी (ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया), डॉ. बॉब डॉयल (हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, अमेरिका), डॉ. एमिली एडलम (चैपमैन यूनिवर्सिटी, अमेरिका) तथा प्रो. मार्कस पी. म्यूलर (इंस्टीट्यूट फॉर क्वांटम ऑप्टिक्स एंड क्वांटम इंफॉर्मेशन, ऑस्ट्रिया) शामिल हैं। ये सभी विशेषज्ञ आधुनिक विज्ञान और दर्शन के उन प्रश्नों पर अपने विचार साझा करेंगे, जो आज विश्वभर में शोध का विषय बने हुए हैं।

आठ दिवसीय इस व्याख्यान श्रृंखला में क्वांटम अनिश्चितता एवं स्वतंत्र इच्छा, भौतिकी में व्यक्तिपरकता, क्वांटम सूचना एवं चेतना, मस्तिष्क, मन और क्वांटम भौतिकी तथा सूचना, संकल्प एवं एजेंसी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान होंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य आधुनिक भौतिकी, तंत्रिका विज्ञान, दर्शनशास्त्र और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बीच विकसित हो रहे अंतःविषय संबंधों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना तथा इस विषय पर सार्थक संवाद को बढ़ावा देना है।

यह व्याख्यान श्रृंखला विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों तथा आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी। कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ अंतःविषय चर्चा, संवाद सत्र तथा प्रश्नोत्तर का आयोजन भी किया जाएगा। नियमित रूप से सहभागिता करने वाले प्रतिभागियों को डिजिटल प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।

राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत की नॉलेज पार्टनर के रूप में सहभागिता का उद्देश्य केवल अपने विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के अधिक से अधिक विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को विश्वस्तरीय वैज्ञानिक कार्यक्रमों से जोड़ना है। इस पहल से ऐसे विद्यार्थियों को भी वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के साथ संवाद का अवसर मिलेगा, जिन्हें सामान्यतः इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय अकादमिक आयोजनों तक प्रत्यक्ष पहुँच नहीं मिल पाती।

यह पहल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडे के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. भारत पांडे, समन्वयक, विज्ञान लोकप्रियकरण प्रकोष्ठ, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत द्वारा किया जा रहा है।

इस संबंध में डॉ. भारत पांडे ने बताया कि प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडे का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विश्वस्तरीय वैज्ञानिक विमर्श तक पहुँच केवल महानगरों के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों एवं विद्वानों से संवाद का समान अवसर मिलना चाहिए, जिससे उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक चिंतन और वैश्विक परिप्रेक्ष्य विकसित हो सके।

डॉ. पांडे ने कहा कि विज्ञान लोकप्रियकरण प्रकोष्ठ निरंतर ऐसे प्रयास कर रहा है, जिनके माध्यम से उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी और शिक्षक विश्व के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों तथा शिक्षाविदों से सीधे जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहलें केवल ज्ञान के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि युवाओं में वैज्ञानिक जिज्ञासा, नवाचार की भावना और अंतःविषय अनुसंधान के प्रति रुचि भी विकसित करती हैं।

आयोजकों के अनुसार, यह व्याख्यान श्रृंखला केवल व्याख्यानों का मंच नहीं होगी, बल्कि विज्ञान, चेतना, दर्शन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बीच उभरते संबंधों पर वैश्विक स्तर के विचार-विमर्श का माध्यम बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की पहलें भविष्य की वैज्ञानिक शिक्षा को अधिक समावेशी, बहुविषयक और वैश्विक दृष्टिकोण से समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।

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