रानीखेत महाविद्यालय के शोधार्थी ललित प्रसाद को पीएचडी उपाधि, भिक्यासैण क्षेत्र पर शोध को मिली सराहना

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रानीखेत। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत के इतिहास विभाग के शोध छात्र ललित प्रसाद को उनके पीएचडी शोधकार्य की सफल मौखिक परीक्षा के बाद शोध उपाधि प्रदान की गई। उनका शोध विषय “भिक्यासैण क्षेत्र का समग्र अध्ययन (ककलासों, सिलोर, धुरा व नैया पट्टी के संदर्भ में)” रहा, जिसे कुमाऊँ अंचल के सूक्ष्म-क्षेत्रीय इतिहास के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।

अपने शोध में ललित प्रसाद ने भिक्यासैण क्षेत्र की विभिन्न पट्टियों—ककलासों, सिलोर, धुरा एवं नैया—के ऐतिहासिक विकास, सामाजिक संरचना, लोक-संस्कृति, आजीविका के साधनों और समय के साथ आए परिवर्तनों का विस्तृत व वैज्ञानिक विश्लेषण किया है। शोध में स्थानीय स्रोतों, अभिलेखों, मौखिक परंपराओं और क्षेत्रीय सर्वेक्षण का उपयोग कर इसे तथ्यपरक और प्रामाणिक बनाया गया है।

इस शोधकार्य का निर्देशन इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पंकज प्रियदर्शी ने किया। मौखिक परीक्षा में बाह्य परीक्षक के रूप में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रो. देवेंद्र कुमार गुप्ता शामिल हुए, जिन्होंने शोध की सराहना करते हुए इसे क्षेत्रीय अध्ययन के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

इस अवसर पर प्रो. संजय घिल्डियाल, प्रो. संजय टम्टा, प्रो. सावित्री कैडा, डॉ. रितेश साह, डॉ. शिवानी रावत सहित कई शिक्षाविद एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। शोधार्थी ने अपने निष्कर्षों का प्रभावी प्रस्तुतीकरण किया और परीक्षकों के प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर दिए।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडे, प्रो. पी.एन. तिवारी, डॉ. महिराज मेहरा, डॉ. दीपा पांडे, डॉ. जे.एस. रावत, डॉ. मुकुल कुमार, डॉ. बी.बी. भट्ट सहित समस्त प्राध्यापकों ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए ललित प्रसाद को शुभकामनाएं दीं।

महाविद्यालय परिवार ने इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए आशा जताई कि यह शोध भविष्य में क्षेत्रीय इतिहास के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री सिद्ध होगा।

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