रानीखेत। उत्तराखण्ड के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भक्तिवेदांत संस्थान, कोलकाता द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन व्याख्यान श्रृंखला “Voyage through the Cosmos – History, Models, Theories, Images and Foundational Issues in Exploring the Universe” का शुभारम्भ 16 मार्च 2026 से हुआ। यह कार्यक्रम 22 मार्च तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत तथा यूकॉस्ट, देहरादून ज्ञान सहयोगी के रूप में जुड़े हैं।
कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र अत्यंत प्रेरणादायक रहा, जिसमें प्रो. दीपांकर बनर्जी (Vice Chancellor, Indian Institute of Space Science and Technology, तिरुवनंतपुरम), प्रो. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम (Director, Indian Institute of Astrophysics, बेंगलुरु) तथा डॉ. ए. के. अनिल कुमार (Director, ISTRAC, ISRO, भारत) ने अतिथि वक्ताओं के रूप में भाग लेते हुए अंतरिक्ष विज्ञान, ब्रह्मांड की संरचना तथा भारत की वैज्ञानिक प्रगति पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। 
उद्घाटन सत्र के पश्चात पहले दिन (16 मार्च) के वैज्ञानिक व्याख्यानों में प्रो. Wendy Freedman (University of Chicago, USA) ने कहा कि ब्रह्मांड की वर्तमान समझ अभी पूर्ण नहीं है और अनेक मूलभूत प्रश्न अभी भी अनुत्तरित हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की खोजें हमारे वैज्ञानिक दृष्टिकोण को नए आयाम देंगी।
इसी क्रम में प्रो. Avi Loeb (Harvard University, USA) ने अपने व्याख्यान में ब्रह्मांड में बाह्य-प्रौद्योगिकीय संकेतों की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि वैज्ञानिकों को खुले दृष्टिकोण के साथ अन्य सभ्यताओं के अस्तित्व की खोज जारी रखनी चाहिए।
दूसरे दिन (17 मार्च) के व्याख्यानों में प्रो. Paul J. Steinhardt (Princeton University, USA) ने बिग बैंग सिद्धांत पर पुनर्विचार की आवश्यकता पर बल देते हुए ब्रह्मांड की उत्पत्ति के वैकल्पिक मॉडल प्रस्तुत किए।
प्रो. Pankaj S. Joshi (Ahmedabad University, India) ने विशाल तारों के जीवन चक्र और ब्लैक होल के निर्माण को सरल भाषा में समझाते हुए इसे ब्रह्मांड की अत्यंत रहस्यमय एवं महत्वपूर्ण प्रक्रिया बताया।
वहीं प्रो. Andrei Linde (Stanford University, USA) ने मल्टीवर्स की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संभव है हमारा ब्रह्मांड अकेला न होकर अनेक ब्रह्मांडों के समूह का हिस्सा हो।
कार्यक्रम के आगामी दिनों में भी यह व्याख्यान श्रृंखला जारी रहेगी, जिसमें प्रो. Ofer Lahav (University College London, UK), प्रो. George Ellis (University of Cape Town, South Africa), Mario Livio (USA), Tejinder Singh (TIFR, भारत), Luke Barnes (Western Sydney University, Australia), Frank J. Tipler (Tulane University, USA), John Schwarz (Caltech, USA), R. N. Iyengar (Jain University, भारत) तथा M. S. Sriram (Chennai, भारत) सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक विभिन्न विषयों पर अपने व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। 
इस अवसर पर प्रो. पुष्पेश पांडे, प्राचार्य, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत ने कहा कि इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान श्रृंखलाएं विशेष रूप से उत्तराखण्ड के ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं, क्योंकि इससे उन्हें विश्व स्तरीय वैज्ञानिकों से सीधे संवाद का अवसर प्राप्त हो रहा है।
प्रो. दुर्गेश पंत, महानिदेशक, यूकॉस्ट, देहरादून ने कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में अपार प्रतिभा विद्यमान है और ऐसे मंच विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर से जोड़कर उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सशक्त बनाते हैं।
कार्यक्रम को ज्ञान सहयोगी के रूप में जोड़ने वाले डॉ. भारत पांडेय ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य उत्तराखण्ड के दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक ज्ञान से जोड़ना है, ताकि वे भी वैश्विक वैज्ञानिक विमर्श का हिस्सा बन सकें और अपने भविष्य को नई दिशा दे सकें।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी सक्रिय सहभागिता करते हुए वैज्ञानिकों से अनेक जिज्ञासापूर्ण एवं तार्किक प्रश्न पूछे, जिससे पूरा आयोजन अत्यंत संवादात्मक, प्रभावशाली एवं प्रेरणादायक बन गया।

