फल्द्वाड़ी ग्राम सभा में लगातार बढ़ रहा तेंदुए का आतंक — वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग।
रिपोर्टर — बलवन्त सिंह रावत
रानीखेत। विकासखण्ड ताड़ीखेत के अंतर्गत ग्राम सभा फल्द्वाड़ी में तेंदुए की लगातार बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र में तेंदुए द्वारा मवेशियों पर लगातार हमले किए जाने के बाद अब ग्रामीणों को अपनी और बच्चों की सुरक्षा की भी चिंता सताने लगी है।
शनिवार सुबह करीब 10 बजे मवड़ा गांव निवासी उमेश चंद की गाय के बछड़े पर तेंदुए ने घर के समीप हमला कर दिया, जिसमें बछड़ा घायल हो गया।
ग्रामीणों के अनुसार तेंदुए की गांव के आसपास लगातार आवाजाही बनी हुई है। बताया गया कि पिछले करीब एक वर्ष के दौरान तेंदुए ने ग्राम सभा क्षेत्र में दर्जनों मवेशियों को अपना शिकार बनाया है। इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, वहीं गांव के लोगों में भय का माहौल लगातार बढ़ता जा रहा है।
CCTV कैमरों में भी कैद हो रही तेंदुए की आवाजाही
ग्राम पंचायत क्षेत्र में लगाए गए CCTV कैमरों में भी तेंदुए की गांव की ओर लगातार आवाजाही रिकॉर्ड होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि इसकी जानकारी समय-समय पर वन विभाग को दी जाती रही है। बावजूद इसके, ग्रामीणों के अनुसार अभी तक तेंदुए की बढ़ती गतिविधियों को रोकने के लिए अपेक्षित प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
ग्राम प्रधान ने की पिंजरा लगाने की मांग
ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए ग्राम प्रधान सोनू आर्या द्वारा वन विभाग से लगातार तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग की जा रही है। इस संबंध में वन विभाग को लिखित शिकायत भी दी जा चुकी है।
ग्राम प्रधान सोनू आर्या ने कहा कि क्षेत्र में तेंदुए की लगातार मौजूदगी अब केवल मवेशियों की सुरक्षा का मामला नहीं रह गई है, बल्कि ग्रामीणों के जान-माल की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “यदि समय रहते वन विभाग द्वारा तेंदुए को पकड़ने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की गई और भविष्य में किसी व्यक्ति के साथ मानव जनहानि की घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?”
किसी बड़ी अनहोनी से पहले कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए की बढ़ती सक्रियता के कारण लोग सुबह और शाम के समय घरों से बाहर निकलने में भी सतर्कता बरत रहे हैं। पशुपालकों को अपने मवेशियों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है, जबकि बच्चों और बुजुर्गों के अकेले बाहर जाने को लेकर भी परिवार चिंतित हैं।
ग्राम प्रधान सोनू आर्या ने वन विभाग से मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल गांव और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण करने, तेंदुए की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने तथा आवश्यकतानुसार पिंजरा लगाने की प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते तेंदुए की बढ़ती गतिविधियों को नियंत्रित नहीं किया गया तो भविष्य में कोई बड़ी घटना हो सकती है। ग्रामीणों की मांग है कि किसी अनहोनी का इंतजार करने के बजाय वन विभाग तत्काल प्रभाव से कार्रवाई कर गांव के लोगों और उनके मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।





