दसवीं की मेरिट से हुआ ग्रामीण डाक सेवकों का चयन, स्थानीय युवाओं में नाराजगी; कोरोना काल में बिना परीक्षा मिले शत-प्रतिशत अंकों को लेकर भी उठ रही चर्चा
पिथौरागढ़। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) भर्ती के परिणाम सामने आने के बाद स्थानीय युवाओं के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। भर्ती में 65 पदों में से 60 पर हरियाणा के अभ्यर्थियों के चयन का दावा किया जा रहा है। इनमें से 50 अभ्यर्थियों के हाईस्कूल में 100 प्रतिशत अंक होने की बात भी सामने आई है। परिणामों के बाद स्थानीय स्तर पर चयन प्रक्रिया और मेरिट प्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। युवाओं का कहना है कि जब अपने ही राज्य में रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं, तो उत्तराखंड के अभ्यर्थियों को अपेक्षित सफलता क्यों नहीं मिल रही है।
दसवीं के अंकों के आधार पर होता है चयन
ग्रामीण डाक सेवक भर्ती की प्रक्रिया अन्य कई सरकारी भर्तियों से अलग है। इसमें सामान्य तौर पर लिखित परीक्षा या साक्षात्कार के बजाय हाईस्कूल में प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाती है। ऐसे में दसवीं में अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को चयन में प्राथमिकता मिलती है।
पिथौरागढ़ में आए हालिया परिणामों ने इसी चयन प्रणाली को लेकर बहस तेज कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि चयन का प्रमुख आधार दसवीं के अंक हैं, तो अलग-अलग राज्यों में बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम और मूल्यांकन प्रणाली में अंतर का असर भी मेरिट सूची पर पड़ सकता है।
पहले की भर्ती में भी हरियाणा के अभ्यर्थियों का दबदबा होने का दावा
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, लगभग दो महीने पहले पिथौरागढ़ जिले में 51 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया हुई थी। बताया जा रहा है कि इनमें से 31 पदों पर नियुक्ति हुई, जिनमें 28 अभ्यर्थी हरियाणा के थे, जबकि केवल तीन अभ्यर्थी उत्तराखंड से चयनित हुए।
अब नई भर्ती में भी हरियाणा के अभ्यर्थियों की बड़ी संख्या में चयन होने की बात सामने आने के बाद स्थानीय युवाओं की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि लगातार ऐसे परिणाम आने से राज्य के उन युवाओं के सामने रोजगार की चुनौती बढ़ सकती है, जो लंबे समय से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं।
हालांकि, इन आंकड़ों और चयन संबंधी दावों की आधिकारिक सूची से पुष्टि होना आवश्यक है। केवल दूसरे राज्य के अभ्यर्थियों का चयन होना अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है।
हिंदी में काम करने में परेशानी के दावों से बढ़ा विवाद
इस भर्ती को लेकर एक अन्य सवाल भी उठाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि कुछ चयनित ग्रामीण डाक सेवकों को हिंदी में सरकारी कामकाज करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इसे लेकर सवाल किया जा रहा है कि यदि अभ्यर्थियों ने हाईस्कूल में हिंदी विषय में अच्छे अंक प्राप्त किए हैं, तो उन्हें कामकाज में परेशानी क्यों हो रही है।
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र भट्ट ने भी भर्ती परिणामों पर आश्चर्य जताया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चयनित कर्मचारियों की कार्यक्षमता और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
हालांकि, हिंदी में काम करने में कठिनाई संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन दावों के आधार पर किसी अभ्यर्थी की योग्यता या चयन की वैधता पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
भर्ती परिणामों के बीच कोरोना महामारी के दौरान हुई बोर्ड परीक्षाओं की व्यवस्था भी चर्चा में है। महामारी के कारण कई राज्यों में स्कूल बंद रहे और कुछ कक्षाओं की परीक्षाएं रद्द कर विद्यार्थियों को वैकल्पिक मूल्यांकन के आधार पर अगली कक्षा में प्रमोट किया गया था।
हरियाणा में भी कोरोना काल के दौरान परीक्षा परिणाम तैयार करने की व्यवस्था को लेकर चर्चा रही। इसी पृष्ठभूमि में सवाल उठाया जा रहा है कि क्या उस समय तैयार किए गए परिणामों में अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को बाद की सरकारी भर्तियों में अतिरिक्त लाभ मिला।
चूंकि ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में हाईस्कूल के अंकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए मेरिट सूची में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या ने इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया है। हालांकि, यह साबित करने के लिए कि किसी विशेष भर्ती में कोरोना काल के मूल्यांकन के कारण चयन प्रभावित हुआ, संबंधित बोर्ड के परिणामों और भर्ती के आधिकारिक आंकड़ों की विस्तृत जांच आवश्यक होगी।
पिथौरागढ़ में भर्ती परिणामों को लेकर स्थानीय युवाओं और लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। उनकी मांग है कि चयन प्रक्रिया से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक किया जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता की शिकायत है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें पारदर्शिता बनी रहे और अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलें। साथ ही, नियुक्ति के बाद कर्मचारियों की कार्यक्षमता और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप काम करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल, इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या भर्ती प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी हुई है। इसका स्पष्ट जवाब आधिकारिक मेरिट सूची, संबंधित बोर्ड के अंकों के सत्यापन और डाक विभाग की ओर से मिलने वाले स्पष्टीकरण के बाद ही सामने आ सकेगा।
अब नजर डाक विभाग के रुख पर है। यदि चयन को लेकर कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो उसकी जांच से भर्ती प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।


