भीमताल में विकास के दावों की खुली पोल! मरीज को डोली में लेकर पहुंचे ग्रामीण,10 साल से विधायक और अब कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा के खिलाफ ग्रामीणों में नाराजगी, मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर उठे सवाल

भीमताल में विकास के दावों की खुली पोल! मरीज को 8 किलोमीटर डोली में लेकर पहुंचे ग्रामीण, अधौड़ा गांव में सड़क के इंतजार में आज भी जिंदगी

 रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला 

भीमताल/ओखलकांडा। भीमताल विधानसभा क्षेत्र में विकास को लेकर किए जा रहे दावों के बीच ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आ रही तस्वीरें सवाल खड़े कर रही हैं।

ओखलकांडा, रामगढ़ और धारी क्षेत्र के दूरस्थ गांवों में आज भी ग्रामीणों को सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है।

ताजा मामला अधौड़ा गांव का है, जहां सड़क सुविधा नहीं होने के कारण बीमार महिला को ग्रामीणों ने डोली के सहारे कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया।

ग्रामीणों के मुताबिक, अधौड़ा गांव के मौड़ा, कुनरा, धमोरी समेत कई तोकों में सड़क सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है।

गंभीर स्थिति में मरीजों को ग्रामीण कंधों पर या डोली के सहारे उबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों से कई किलोमीटर तक ले जाने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाना विकास के दावों पर बड़ा सवाल है।

महिला के पैर में हुआ फोड़ा, 8 किलोमीटर डोली से पहुंचाया

समाजसेवी दीपक सिंह मेहरा के मुताबिक, अधौड़ा गांव की एक महिला के पैर में फोड़ा हो गया था। घरेलू उपचार से जब राहत नहीं मिली तो महिला को उपचार के लिए अस्पताल ले जाना जरूरी हो गया। महिला चलने में असमर्थ थी, ऐसे में ग्रामीणों ने उसे डोली में बैठाया और करीब 8 किलोमीटर तक पैदल चलकर नजदीकी मोटर मार्ग तक पहुंचाया।

इस दौरान ग्रामीणों को पथरीले और बेहद उबड़-खाबड़ रास्तों के साथ जंगल की झाड़ियों तथा खड़ी पहाड़ी वाली पगडंडियों से होकर गुजरना पड़ा। ग्रामीणों ने किसी तरह महिला को सड़क तक पहुंचाया, जहां से उसे आगे उपचार के लिए ले जाया गया। उपचार के बाद महिला स्वस्थ होकर गांव लौट चुकी है।

ग्रामीणों ने वीडियो बनाकर दिखाई ‘विकास’ की तस्वीर

मरीज को डोली के सहारे ले जाते ग्रामीणों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बनाया। ग्रामीणों का कहना है कि यह तस्वीर किसी एक दिन की समस्या नहीं है, बल्कि दूरस्थ गांवों में लंबे समय से लोग इसी तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने वीडियो के जरिए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और सरकार के विकास के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि गांव तक सड़क होती तो मरीज को घंटों तक पहाड़ी रास्तों पर डोली में ले जाने की मजबूरी नहीं होती।

सड़क के साथ पानी और बिजली की समस्या भी

ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में समस्या केवल सड़क तक सीमित नहीं है। ओखलकांडा ब्लॉक के कई गांवों में पेयजल समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी कमी बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन समस्याओं को उठाया जा रहा है, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हो पाया है।

वहीं, क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट और अन्य विकास कार्यों को लेकर भी समय-समय पर अनियमितताओं के आरोप लगाए जाते रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

2027 से पहले विकास के दावों पर बढ़ेगा दबाव?

राम सिंह कैड़ा लंबे समय से भीमताल विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में प्रमुख भूमिका में हैं और वर्तमान में कैबिनेट मंत्री हैं। ऐसे में दूरस्थ ग्रामीण इलाकों से सामने आ रही ये तस्वीरें सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के विकास कार्यों पर सवाल खड़े कर रही हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भीमताल के दूरस्थ गांवों में सड़क, पानी और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं का समाधान कितना हो पाता है। क्या विकास के दावे जमीन पर दिखाई देंगे या फिर ग्रामीणों की नाराजगी आगामी चुनाव में राजनीतिक मुद्दा बनेगी—यह आने वाला समय बताएगा।

दीपक सिंह मेहरा ने बताया कि महिला के पैर में फोड़ा होने के बाद वह चलने में असमर्थ थी। ग्रामीणों ने डोली के माध्यम से करीब आठ किलोमीटर तक उसे पैदल ले जाकर सड़क मार्ग तक पहुंचाया।

उन्होंने कहा कि दुर्गम रास्तों के कारण ग्रामीणों को आए दिन ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

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