अल्मोड़ा : पिरूल से सृजन, गांव से संवाद: एनएसएस शिविर के तृतीय दिवस की अनोखी पहल

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अल्मोड़ा। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुणीधार, मानिला (अल्मोड़ा) की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा आयोजित सप्त दिवसीय विशेष शिविर के तृतीय दिवस का शुभारंभ दिनांक 25 मार्च 2026 को प्रातः योग सत्र के साथ हुआ।

योग प्रशिक्षक  प्रियंका बेलवाल ने स्वयंसेवियों को विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया, जिससे दिन की शुरुआत ऊर्जा और उत्साह के साथ हुई।

इसके उपरांत आयोजित बौद्धिक सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में महाविद्यालय की पूर्व छात्रा व उद्यमी सुश्री गीता पंत उपस्थित रहीं।

उन्होंने उत्तराखंड के वनों में अपशिष्ट के रूप में पाए जाने वाले पिरूल (चीड़ की पत्तियों) से सुंदर एवं उपयोगी कलात्मक वस्तुएं बनाने की कला का प्रदर्शन किया। उनके इस नवाचार ने स्वयंसेवियों को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्वरोजगार के नए आयामों से भी अवगत कराया।

द्वितीय सत्र में स्वयंसेवियों द्वारा जनजागरूकता रैली निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक किया गया।

इसके साथ ही स्वयंसेवियों ने कुणीधार ग्राम का विस्तृत सर्वेक्षण किया, जिसमें स्थानीय लोगों की समस्याओं—जैसे जल संकट, स्वच्छता व्यवस्था, रोजगार के अवसर एवं अन्य सामाजिक मुद्दों—की जानकारी एकत्रित की गई। सर्वेक्षण के दौरान ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित कर उनके समाधान पर भी चर्चा की गई।

तृतीय सत्र में शिविरार्थियों के बीच लेख-लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें स्वयंसेवियों ने विभिन्न सामाजिक विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किये, जिनमें से कुछ चुनिंदा लेख महाविद्यालय की ई-मासिक पत्रिका ‘मानिलावाणी’ में प्रकाशित किए जाएंगे जो महाविद्यालय की आधिकारिक वेबसाईट पर उपलब्ध है।

इस प्रकार एन.एस.एस. शिविर का तृतीय दिवस योग, पर्यावरणीय जागरूकता, सामाजिक सहभागिता और रचनात्मक गतिविधियों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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