रिपोर्टर – बलवंत सिंह रावत
रानीखेत। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय केंद्र रानीखेत ने शिक्षा और कौशल विकास को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाने के उद्देश्य से इंटर कॉलेज मजखाली और इंटर कॉलेज द्वारसों में छात्र अभिप्रेरणा कार्यक्रम का आयोजन किया।
इन कार्यक्रमों ने न केवल विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से परिचित कराया बल्कि उन्हें भविष्य की बदलती चुनौतियों के लिए तैयार होने का अवसर भी दिया।
इस अवसर पर सहायक क्षेत्रीय निदेशक रुचि आर्या और उमाशंकर नेगी ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की उन पहलों से अवगत कराया, जो खासतौर पर दूरस्थ और पहाड़ी अंचलों के छात्रों के लिए बनाई गई हैं।
उन्होंने बताया कि शिक्षा अब केवल डिग्री तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, पेशेवर क्षमता और उद्यमिता कौशल को विकसित करने का माध्यम बन चुकी है।
कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में शिक्षा का स्वरूप बहुआयामी हो गया है। अब केवल पारंपरिक विषयों की जानकारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीकी दक्षता, समस्या-समाधान क्षमता और नवाचार की सोच भी उतनी ही आवश्यक है।
इस संदर्भ में विद्यार्थियों को यह समझाया गया कि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित कौशल-आधारित पाठ्यक्रम उन्हें नौकरी खोजने वाले की बजाय नौकरी देने वाला बनने की दिशा में अग्रसर कर सकते हैं।
श्रीमती रुचि आर्या ने अपने संबोधन में युवाओं को यह संदेश दिया कि भविष्य उन्हीं का है जो लगातार सीखते रहते हैं और परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालते हैं। वहीं, श्री उमाशंकर नेगी ने डिजिटल शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अब शिक्षा की सीमाएँ कक्षा-कक्ष तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि मोबाइल और कंप्यूटर के माध्यम से छात्र विश्वस्तरीय संसाधनों तक पहुँच बना सकते हैं।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण यह रहा कि विद्यार्थियों को सिर्फ विश्वविद्यालय की योजनाओं की जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि उन्हें यह भी बताया गया कि इन योजनाओं से उनका व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन कैसे बेहतर हो सकता है।
उदाहरणस्वरूप, स्वरोजगार योजनाएँ न केवल व्यक्तिगत आत्मनिर्भरता देती हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाती हैं।
समापन सत्र में सहायक क्षेत्र निदेशक ऊंची आर्य उमाशंकर नेगी, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं इन.सी.सी के कैडेट्स मौजूद रहे। तथा विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अवसरों का लाभ उठाएँ और शिक्षा को केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने का साधन न मानें, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला साधन समझें।
