रानीखेत महाविद्यालय में 26–27 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का भव्य आयोजन

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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत में 26–27 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का भव्य आयोजन

रानीखेत। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत में 26 फरवरी 2026 (प्रथम दिवस) एवं 27 फरवरी 2026 (द्वितीय दिवस) को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का दो दिवसीय भव्य एवं प्रेरणादायक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

यह कार्यक्रम महाविद्यालय की विज्ञान लोकप्रियीकरण समिति के तत्वावधान में तथा विज्ञान भारती, देहरादून के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना तथा विशेष रूप से ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों को शोध, नवाचार और वैज्ञानिक गतिविधियों के प्रति प्रेरित करना था।

26 फरवरी 2026 को आयोजित प्रथम दिवस पर स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों हेतु पोस्टर प्रस्तुति, मौखिक प्रस्तुति तथा मॉडल प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह और आत्मविश्वास के साथ सहभागिता करते हुए अपनी वैज्ञानिक समझ, तार्किक क्षमता एवं रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। विभिन्न विषयों पर तैयार किए गए पोस्टर और मॉडलों ने विद्यार्थियों की शोधपरक सोच और नवाचार क्षमता को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।

27 फरवरी 2026 को आयोजित द्वितीय दिवस पर तीन विशिष्ट वैज्ञानिकों के ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित किए गए। डॉ. अविनाश धमीजा ने नैनो-संरचित पदार्थों के आधुनिक अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला। डॉ. नेहा पांडेय ने जैव प्रौद्योगिकी में सूक्ष्मजीव विविधता की भूमिका एवं उसके व्यावहारिक महत्व को स्पष्ट किया।

डॉ. यसीरा इस्माइल ने क्वांटम संचार तकनीकों तथा भविष्य की वैज्ञानिक संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। इन व्याख्यानों ने विद्यार्थियों को समकालीन शोध क्षेत्रों से परिचित कराया तथा उन्हें उच्च स्तरीय अनुसंधान के लिए प्रेरित किया।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडे ने अपने संबोधन में कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों में अपार प्रतिभा निहित है और उचित मार्गदर्शन तथा अवसर मिलने पर वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और निरंतर अध्ययनशील बने रहने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. भारत पांडेय ने बताया कि विज्ञान लोकप्रियीकरण समिति के अंतर्गत प्राणीशास्त्र, भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित एवं वनस्पति विज्ञान विभाग सामूहिक रूप से कार्य कर रहे हैं। यह आयोजन सभी विज्ञान विभागों की संयुक्त शैक्षणिक पहल का परिणाम है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में वैज्ञानिक चेतना को सुदृढ़ करना है।

सह-समन्वयक डॉ. स्तुति जोशी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विज्ञान केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तार्किक चिंतन और समस्या समाधान की प्रक्रिया है। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध गतिविधियों, परियोजनाओं एवं नवाचार आधारित कार्यों में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया।

समिति की सदस्य डॉ. निधि शर्मा ने सभी विज्ञान विभागों के शिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, प्रस्तुतीकरण कौशल तथा टीम भावना का विकास करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से जिज्ञासु बने रहने और वैज्ञानिक सोच को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. शीतल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं शिक्षकों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर प्रो. पी.एन. तिवारी, डॉ. निर्मला जोशी, डॉ. प्राची जोशी, डॉ. दीपा पांडेय, डॉ. रश्मि रौतेला, डॉ. प्रसून जोशी, डॉ. निहारिका, डॉ. किरण, डॉ. आरती, डॉ. गरिमा सहित समस्त विज्ञान संकाय एवं अन्य संकायों के प्राध्यापक उपस्थित रहे और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।

समापन सत्र में विभिन्न प्रतियोगिताओं के कुल 17 विजेताओं को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। स्नातक पोस्टर प्रस्तुति में हर्षिता एवं संजना प्रथम, अंजली एवं प्रेरणा द्वितीय तथा आयुष सती तृतीय स्थान पर रहे। स्नातकोत्तर पोस्टर प्रस्तुति में हेमा प्रथम, रिया तिवारी द्वितीय तथा भास्कर सत्यावली एवं गरिमा बिष्ट तृतीय स्थान पर रहे। स्नातक मौखिक प्रस्तुति में प्रेरणा प्रथम रहीं। स्नातकोत्तर मौखिक प्रस्तुति में शुभम तिवारी प्रथम, विवेक गोस्वामी द्वितीय तथा ऋतु आर्या तृतीय रहे। मॉडल प्रदर्शनी में कविता आर्या प्रथम, डॉली जोशी द्वितीय तथा मानसी चन्द्रा एवं दिव्या कुमारी तृतीय स्थान पर रहीं।

दो दिवसीय यह आयोजन अत्यंत सफल, सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायक रहा। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक चेतना को सुदृढ़ किया तथा ग्रामीण प्रतिभाओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंचों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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