क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, थापला, रानीखेत मे “औषधीय पौधों की खेती के माध्यम से सतत आजीविका विकास” कार्यशाला का एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया।
रिपोर्ट- बलवन्त सिंह रावत
रानीखेत । केन्द्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार, रानीखेत (थापला) मे संस्थान द्वारा एक दिवसीय “औषधीय पौधों की खेती के माध्यम से सतत आजीविका विकास” कार्यशाला का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम प्रभारी सहायक निदेशक डॉंक्टर ओम प्रकाश, सेवानिवृत्त वन क्षेत्राधिकारी मदन सिंह बिष्ट व वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक इन्द्र लाल आर्या ने संयुक्त रूप मे भगवान धनवंतरी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित एवं धन्वंतरी वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। तत्पश्चात प्रभारी सहायक निदेशक डॉ. ओम प्रकाश द्वारा सभी वक्ताओं का मंच पर स्वागत करते हुए स्वागत भाषण दिया एवं कार्यशाला के सफल आयोजन की कामना की, वही अनुसंधान अधिकारी (वन.) डॉंक्टर गजेन्द्र राव, द्वारा कार्यशाला के विषय का परिचय प्रस्तुत किया गया।
बता दे कि “औषधीय पौधों की खेती के माध्यम से सतत आजीविका विकास” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विभिन्न स्थानीय समाजसेवी संस्थाओं की लगभग 70 से अधिक महिला किसान एवं अन्य स्थानीय कृषक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया और संस्थान के प्रभारी सहायक निदेशक द्वारा कार्यशाला का निष्कर्ष सम्बोधन में कार्यशाला का उद्देश्य औषधीय पौधों की वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित कर ग्रामीण क्षेत्रों में सतत आजीविका के अवसरों का सृजन कैसे किया जा सकता है उसके बारे में जानकारी प्रदान की गई।
वही केन्द्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के महानिदेशक महोदय प्रो. वैद्य रबीनारायण आचार्य आभासी माध्यम से उपस्थित रहे। उन्होंने कार्यशाला में आए सभी किसानों को संबोधित करते हुए औषधीय पौधों की वैज्ञानिक खेती एवं विपणन की आवश्यकता पर बल दिया एवं आश्वस्त किया गया कि किसानों द्वारा उगायी गयी औषधीय फसलों को बाजार उपलब्ध करायी जाऐगी व कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु शुभकामनाएं दी गयी।
कार्यशाला के पहले सत्र मे मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त वन क्षेत्राधिकारी मदन सिंह बिष्ट ने अपने संबोधन मे औषधीय पौधों की खेती, संरक्षण एवं उनके विपणन पर विस्तृत व्याख्यान दिया। जिसके बाद द्वितीय सत्र में वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक इन्द्र लाल आर्या द्वारा जैविक खेती एवं राज्य सरकार की कृषकों हेतु संचालित विभिन्न योजनाओं पर जानकारी प्रदान की गई।
प्रभारी सहायक निदेशक डॉंक्टर ओम प्रकाश ने बताया कि यह जो कार्यशाला का आयोजन किया गया है वो हमारे स्थानीय किसान जो है, उनको खेती के बारे में अधिक से अधिक प्रशिक्षित करने का हमारा उद्देश्य है। हमने काफी अनुभवी लोगों को बुलाया है। जिसमे उत्तराखंड वन विभाग से रिटायर्ड रेंजर मदन सिंह बिष्ट और हॉर्टिकल्चर विभाग में कार्यरत इंदर लाल उपस्थित रहे है। दोनों ही अपने क्षेत्र के विशेषज हैं, इनका कार्य हमने भी देखा है। इनके अनुभव का लाभ हमारे क्षेत्र के किसानों को भी मिले, उनकी औषधीय कार्यो में रुचि बड़े और उसका उत्पादन ज्यादा से ज्यादा हो। उन्होने कहा कि हमारे माननीय महानिदेशक महोदय ने भी आश्वस्त किया है कि जितने भी हमारे किसान भाई आए हैं, इनमें से अगर 5 भी औषधीय पौधों की खेती करते हैं, तो इनकी मार्केटिंग हमारी ओर से की जाएगी। आयुष मंत्रालय का एक विभाग जो ऐसे किसानों को जो औषधीय पौधों की खेती करना चाहते है, उनको सहयोग के लिए धनराशि भी उपलब्ध कराता है, और उत्पाद के विक्रय में भी सहयोग देता है।
महिला कृषक ने अपने अनुभव के बारे मे बताया कि हमें औषधियों के बारे में इतनी जानकारी दी। जिसमे हिसालु, किलमोडा जैसी चीजें भी है, जो हमने खाई भी है, लेकिन इनका उपयोग कैसे होता है, खासकर औषधि बनाने में, हमे इसके बारे में कभी पता नहीं था। वही कार्यशाला मे घरेलू दवाईयों के बारे में भी बताया गया। बहुत सी चीजें है जो बस देखी है, पर इनका कभी ऐसा उपयोग भी होगा इसके बारे मे पता नहीं था। हम सबको यहा आकर बहुत कुछ सीखने के मिला।
इस अवसर पर डॉंक्टर गजेन्द्र राव, अनुसंधान अधिकारी (वन.), डॉंक्टर वी. बी. कुमावत, अनुसंधान अधिकारी (आयु.), डॉक्टर तरूण कुमार, अनुसंधान अधिकारी (आयु), डॉंक्टर हरित कुमारी, अनुसंधान अधिकारी (आयु.) सहित क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान के डॉक्टर्स व कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉंक्टर तरुण कुमार, अनुसंधान अधिकारी (आयु.) एवं आयोजक सचिव डॉ. दीपशिखा आर्या, अनुसंधान अधिकारी (वन.) ने किया।




















