अल्मोड़ा बस हादसे की दर्दनाक कहानी, दंपती ने जिंदगी संग बिताई; दुनिया से एक साथ हुई विदाई
अल्मोड़ा। भिकियासैंण में सड़क किनारे बने गड्ढे में बस का टायर चले जाने और इसके बाद अचानक स्टेयरिंग फेल हो जाने से मंगलवार सुबह शिलापानी बैंड के पास बड़ा हादसा हो गया।
रामनगर जा रही कुमाऊं मोटर ओनर यूनियन (केएमओयू) लिमिटेड की यात्री बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस दर्दनाक दुर्घटना में सात यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 12 लोग घायल हो गए। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
केएमओयू बस संख्या यूके 07 पीए 4025 सुबह करीब छह बजे द्वाराहाट के नोबाड़ा से रामनगर के लिए रवाना हुई थी। लगभग आठ बजे शिलापानी बैंड से 700 मीटर दूर सिरकोन गधेरे में जा गिरी। मोड़ पर सड़क की खराब स्थिति के चलते बस का टायर किनारे बने गड्ढे में चला गया।
स्टेयरिंग फेल होने से चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और बस सीधे 100 फीट गहरी खाई में जा गिरी।
हादसा इतना भीषण था कि छह यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक घायल ने उपचार के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया।
सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचीं। खाई की गहराई अधिक होने के कारण राहत-बचाव कार्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हालांकि स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से अभियान युद्धस्तर पर चलाया गया। सभी घायलों को सीएचसी में भर्ती कराया गया।
हादसे में दो गंभीर घायल नंदा बल्लभ और हंसी देवी को एयर लिफ्ट किया गया।
दो घायलों नंदी देवी और राकेश कुमार को रामनगर हायर सेंटर रेफर किया गया है।
मृतकों का भिकियासैंण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ही पोस्टमॉर्टम किया जा रहा है।
दुर्घटना में घायल जितेंद्र रिखाडी ने बताया गड्ढे में टायर गया और उसके बाद जोर की आवाज आई और सीधे गधेरे में गाड़ी जा गिरी। बस के ड्राइवर नवीन चंद तिवारी ने बताया कि गाड़ी का एक साइड का टायर गड्ढे में गया और फिर स्टेयरिंग फेल हो गया। संकरी जगह होने और कोई क्रश बैरियर नहीं होने से बस गधेरे में जा गिरी।
दुर्घटना के मृतक
- पार्वती देवी पत्नी गोविंद बल्लभ मठपाल (75) निवासी- ग्राम धारवाली, विनायक जमोली।
- गोविंद बल्लभ मठपाल (80) निवासी- उपरोक्त।
- तारा देवी (50) पत्नी महेश चंद्र निवासी- पाली दौला विनायक भिकियासैंण।
- नरेंद्र सिंह सूबेदार (65) पुत्र गोपाल सिंह निवासी- ग्राम जमोली, विनायक भिकियासैंण।
- गणेश (20) पुत्र भीम बहादुर निवासी नेपाल
- उमेश (18) पुत्र नामालुम निवासी नेपाल
- गोविंदी देवी (58) ग्राम घुघुतीं थाना द्वाराहाट
घायलों के नाम
- नंदा बल्लभ (50 वर्ष), पुत्र सदानंद निवासी नौबड़ा
- राकेश कुमार (55 वर्ष), पुत्र महावीर प्रसाद निवासी जीआईसी द्वाराहाट
- नंदी देवी पत्नी देवेंद्र सिंह (40 वर्ष) निवासी नौगाड़
- हंसी सती (36 वर्ष) पत्नी राकेश चन्द्र निवासी सिंगोली
- मोहित सती (16 वर्ष), निवासी नौघर
- बुद्धि बल्लभ भगत (58 वर्ष) निवासी जमोली
- हरीश चंद्र (62 वर्ष) निवासी पाली
- भूपेंद्र सिंह अधिकारी (64 वर्ष) निवासी जमोली
- जितेंद्र रेखाड़ी (37 वर्ष) निवासी चितायनक
- नवीन चंद्र (55 वर्ष) पुत्र दुर्गादत्त तिवाड़ी (ड्राइवर)
- हिमांशु पालीवाल (17 वर्ष), पुत्र महेश चन्द्र पालियाल
- प्रकाश चंद्र (43 वर्ष) पुत्र रामदत्त निवासी चचरोटी, सल्ट
दुर्घटना के सभी घायलों को रेस्क्यू कर लिया गया है कुछ घायलों को रेफर व एयर लिफ्ट कर ऋषिकेश पहुंचाया गया है। पूरी घटना की जांच कर कारणों का पता लगाया जाएगा।

शिलापानी बस हादसे ने रानीखेत वालों को भी झकझोर कर रख दिया। जीवन का बड़ा समय चिलियानौला में बिताने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक गोविंद बल्लभ मठपाल (गोविंद मास्साब) ने इसी शहर को अपना गांव घर मान लिया था।
महानगरीय चकाचौंध के इतर उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद रानीखेत से ही दिल लगा लिया। जीवनसाथी पार्वती देवी (ताई) साथ ही रही। मगर नियति देखिए पहाड़ में चैन सुकून के साथ बुढ़ापा काट रहा यह दंपती दुनिया से विदा भी एकसाथ हो गया।
मूल रूप से जमोली (भिकियासैंण ब्लाक) निवासी गोविंद मास्साब लंबे समय तक प्राथमिक विद्यालय चिलियानौला में अध्यापक रहे। बाद में वह जूनियर हाईस्कूल के हेडमास्टर बने। वर्ष 2005 में सेवानिवृत्ति के बाद वह यहीं के होकर रह गए। उनके चार पुत्र हैं। एक पुत्र दिनेश चंद्र मठपाल ताड़ीखेत बिजली सब स्टेशन में आपरेटर हैं। वही माता-पिता के करीब रहे।
राजेंद्र हल्द्वानी, त्रिभुवन दिल्ली व नवीन रामनगर में रहते हैं। मगर गोविंद मास्साब व उनकी जीवनसंगिनी पार्वती देवी का मन मैदान में कभी लगा ही नहीं। मास्साब ने चिलियानौला को ही अपनी कर्म भूमि मान लिया और पुरोहिती भी करने लगे।
व्यापार मंडल नगर अध्यक्ष कमलेश सिंह बौरा के अनुसार मठपाल दंपती चिलियानौला नगर में सबसे बुजुर्ग थे। लोगों के 80 वर्षीय गोविंद मास्साब से आत्मीय रिश्ता जुड़ चुका था और वह बच्चे व बड़ों के ताऊ व ताई थे। इस बीच वह अपने पैतृक गांव जमोली गए थे।


