रानीखेत। कड़ाके की ठंड में जहाँ लोग अपने-अपने घरों में सिमट जाते हैं, वहीं ग्राम अभ्याड़ी के समाजसेवी सतीश चन्द्र पाण्डेय मानवता की एक अनोखी मिसाल पेश कर रहे हैं।
वे बीते दो दशकों से हर वर्ष ठंड के मौसम में अपने घर के आगे अलाव जलाकर सैकड़ों राहगीरों, ग्रामीणों और जरूरतमंदों को ठिठुरती ठंड से राहत पहुंचा रहे हैं।
ग्राम अभ्याड़ी लगभग 5–6 गांवों का केंद्र बिंदु है। यहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। गांव में एक छोटी-सी बाजार भी है, जहां सब्जी विक्रेता और वाहन चालकों की आवाजाही बनी रहती है, लेकिन क्षेत्र में कोई प्रतिक्षालय नहीं है।
ऐसे में सतीश चन्द्र पाण्डेय ने अपने घर को ही प्रतिक्षालय का रूप दे दिया है।
पाण्डेय प्रतिदिन सुबह 6 बजे से 10 बजे तक अलाव जलाते हैं, जहां सैकड़ों लोग आग सेंककर ठंड से राहत पाते हैं।
अक्टूबर माह से शुरू होकर लगभग छह माह तक यह सेवा निरंतर जारी रहती है।
इस मानवीय सेवा के लिए वे हर वर्ष जंगल से सूखी लकड़ी एकत्र कर, उसे कटवाकर और ढुलान कर अलाव की व्यवस्था करते हैं।
इस कार्य में वे अपनी जेब से हजारों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन कभी थकान या दिखावे की भावना नहीं रखते।
सुबह होते ही उनके घर के सामने आग तापने वालों की भीड़ लग जाती है। आसपास के गांवों के महिला-पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे इस सेवा से लाभान्वित होते हैं और सतीश चन्द्र पाण्डेय की इस निस्वार्थ सेवा की सराहना करते नहीं थकते।
ठिठुरती ठंड में जलता यह अलाव सिर्फ आग नहीं, बल्कि मानवता, संवेदना और समाज सेवा की गर्माहट भी फैलाता है।




















