देहरादून। शांत वादियों के लिए पहचाने जाने वाले उत्तराखंड में लगातार बढ़ती हत्या की घटनाओं ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले 16 दिनों में पांच हत्याओं की वारदात सामने आने से आमजन में भय का माहौल है और पुलिस-प्रशासन के सुरक्षा दावों की पोल खुलती नजर आ रही है।
अधिकांश मामलों में आपसी रंजिश और जमीन विवाद हत्या की वजह बने हैं, जिससे पुलिस गश्त और खुफिया तंत्र की सक्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ढालीपुर में छात्रा की नृशंस हत्या
29 जनवरी को विकासनगर के ढालीपुर क्षेत्र में 12वीं की छात्रा की दरांती और पत्थर से हमला कर हत्या कर दी गई। छात्रा अपने चचेरे भाई के साथ दवा लेने गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी।
तलाश करने पर उसका शव शक्तिनहर किनारे झाड़ियों में मिला। सिर पर गंभीर चोटें थीं और चेहरा पत्थर से कुचला गया था। मौके से बाइक, दरांती और पत्थर बरामद हुए, जबकि आरोपित चचेरा भाई फरार है।
ऋषिकेश में महिला को गोली मारी
31 जनवरी की रात ऋषिकेश के शिवाजी नगर में 35 वर्षीय प्रीति, जो एम्स में अटेंडेंट थी, को दरवाजा खोलते ही गोली मार दी गई। गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बाद में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
दूल्हा बाजार में युवती की हत्या
2 फरवरी को मच्छी बाजार स्थित दूल्हा बाजार में 22 वर्षीय युवती का चापड़ से गला काटकर हत्या कर दी गई। युवती ने पहले ही आरोपित आकाश कुमार के खिलाफ धमकी की शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस समय रहते उसे नहीं पकड़ सकी। वारदात के बाद आरोपी गिरफ्तार कर लिया गया।
तिब्बती मार्केट में कारोबारी की दिनदहाड़े हत्या
11 फरवरी को परेड ग्राउंड के पास तिब्बती मार्केट में कारोबारी अर्जुन शर्मा को शूटरों ने गोली मार दी। हमलावर बिना नंबर की स्कूटी से फरार हो गए और बाद में हुलिया बदल लिया। पुलिस ने दो शूटरों सहित पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।
गैंगस्टर की हत्या से दहशत
13 फरवरी को रायपुर क्षेत्र के सिल्वर सिटी स्थित जिम के बाहर झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमलावर बाइक से फरार हो गए। पुलिस इसे गैंगवार मानते हुए आरोपितों की तलाश कर रही है।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है और लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। नागरिकों का कहना है कि प्रभावी गश्त और समय रहते कार्रवाई से कई वारदातें रोकी जा सकती थीं।




















