पहाड़ों में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की खुली पोल : गर्भवती आंगनबाड़ी सहायिका की उपचार के दौरान मौत, हंगामा

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बागेश्वर।  कपकोट पुलिस क्षेत्र अंतर्गत तिरवाण गांव की एक गर्भवती आंगनबाड़ी सहायिका की उपचार के दौरान मौत हो जाने के बाद जिला अस्पताल में हंगामा खड़ा हो गया।

पोस्टमार्टम और पंचायतनामा की कार्रवाई में करीब दस घंटे की देरी से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल के बाहर सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। उन्होंने अस्पताल प्रशासन और पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगाए।

जानकारी के अनुसार तिरवाण निवासी 27 वर्षीय तनुजा देवी पत्नी मोहन चंद्र तीन माह की गर्भवती थीं और आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर कार्यरत थीं।

बुधवार रात अचानक उनके पेट में तेज दर्द उठा, जिसके बाद परिजन उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कपकोट लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि वहां महिला चिकित्सक उपलब्ध नहीं थी, जिसके चलते प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

गुरुवार सुबह करीब चार बजे जिला अस्पताल में उपचार के दौरान तनुजा देवी की मौत हो गई। परिजनों के अनुसार प्रारंभिक जानकारी में गर्भ नली फंसने की आशंका जताई गई, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गर्भ संबंधी आवश्यक जांच और अल्ट्रासाउंड समय पर नहीं कराया गया।

मौत के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवा दिया, लेकिन अपराह्न दो बजे तक न तो पंचायतनामा भरा गया और न ही पोस्टमार्टम हो पाया।

इससे नाराज परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने अस्पताल परिसर के बाहर सड़क पर जाम लगाकर नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जबकि परिजन घंटों से परेशान हो रहे हैं।

स्थिति बिगड़ने पर कोतवाल अनिल उपाध्याय और सीएमएस डॉ. तपन शर्मा मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाकर शांत कराया। सीएमएस डॉ. तपन शर्मा ने बताया कि तनुजा देवी गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची थीं और डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। बाद में पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी कराई गई।

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