द्वाराहाट के रतखाल में बिना पंजीकरण संचालित गौशाला पर उठे सवाल, 160 से अधिक गायों की बदहाल स्थिति; ग्राम प्रधानों ने बंद कराने की मांग की

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विकासखण्ड द्वाराहाट के रतखाल में गायों के साथ हो रहा अत्याचार। बगैर रजिस्ट्रेशन चलाई जा रही गौशाला, ग्राम प्रधानों ने दिया उपजिलाधिकारी को ज्ञापन। कहा शीघ्र हो गौ सदन बंद।

उपजिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, पशुपालन विभाग की जांच में क्षमता से अधिक पशु और मानकों के उल्लंघन की बात सामने आई

रिपोर्ट- बलवन्त सिंह रावत 

 रानीखेत/द्वाराहाट। अल्मोड़ा जिले के विकासखंड द्वाराहाट के रतखाल क्षेत्र में बिना पंजीकरण संचालित एक गौशाला को लेकर विवाद गहरा गया है। क्षेत्र के चार ग्राम प्रधानों ने उपजिलाधिकारी द्वाराहाट को ज्ञापन सौंपकर गौशाला को तत्काल बंद करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला में गौवंश के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है तथा उनकी देखभाल के लिए न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।

बताया जा रहा है कि महावतार बाबा की गुफा स्थल के निकट मां दूनागिरी के नाम से संचालित इस गौशाला में करीब 160 से अधिक गायों को रखा गया है। आरोप है कि गौशाला का पंजीकरण नहीं कराया गया है और इसे निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार पशुओं के लिए पर्याप्त हरा चारा और भूसा उपलब्ध नहीं है। अधिकांश गायों को खुले में बारिश और तेज धूप के बीच बांधकर रखा जाता है, जबकि उनके लिए स्थायी शेड या सुरक्षित आश्रय की भी व्यवस्था नहीं है।

सोशल मीडिया पर गौशाला की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद सोमवार को पशुपालन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि गौशाला में उपलब्ध स्थान की तुलना में कहीं अधिक संख्या में गायों को रखा गया है। निरीक्षण में कुछ पशु बीमार और संक्रमित अवस्था में मिले, जबकि कई गायों की हालत चिंताजनक बताई गई। कुछ पशुओं को अस्थायी टेंट के भीतर भी रखा गया था, जहां क्षमता से अधिक संख्या में गायों के रहने की बात सामने आई।
पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में माना कि गौशाला संचालन में कई मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। सीमित स्थान में अधिक पशु रखने से संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। विभाग ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इधर क्षेत्र के चार ग्राम प्रधानों ने उपजिलाधिकारी को ज्ञापन देकर मांग की है कि गौशाला को तत्काल बंद किया जाए तथा संचालकों के खिलाफ पशु क्रूरता और नियमों के उल्लंघन के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि गौसेवा के नाम पर गौवंश के साथ इस प्रकार की लापरवाही और अत्याचार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। यदि जांच में सभी आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित गौशाला के संचालन पर रोक लगाने के साथ-साथ जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

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