तल्ली कहाली के ग्रामीण बने मिसाल, श्रमदान कर सड़कों किनारे की झाड़ियां काटीं; हादसों और वन्यजीव खतरे को किया कम
रिपोर्टर : बलवंत सिंह रावत
रानीखेत/द्वाराहाट। बरसात के मौसम में सड़कों के किनारे उगी घनी झाड़ियों और वनस्पतियों से बढ़ रहे सड़क हादसों तथा जंगली जानवरों के खतरे को देखते हुए द्वाराहाट क्षेत्र के तल्ली कहाली गांव के ग्रामीणों ने सराहनीय पहल की है। प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई का इंतजार करने के बजाय ग्रामीणों ने स्वयं आगे आकर श्रमदान के माध्यम से गांव के संपर्क मार्गों और सार्वजनिक स्थलों पर झाड़ी कटाई अभियान शुरू कर दिया है।
लगातार हो रही बारिश के कारण सड़क किनारे झाड़ियां तेजी से बढ़ गई थीं। इससे मार्गों पर दृश्यता काफी कम हो गई थी और वाहन चालकों को सामने से आने वाले वाहनों को देखने में परेशानी हो रही थी। कई स्थानों पर मोड़ों के आसपास स्थिति और भी गंभीर हो गई थी, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि इन झाड़ियों में जंगली जानवरों के छिपे रहने का भी खतरा बना रहता है, जिससे राहगीरों, महिलाओं और स्कूल आने-जाने वाले बच्चों में भय का माहौल था।
इन परिस्थितियों को देखते हुए गांव के लोगों ने सामूहिक रूप से श्रमदान करने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने सड़क किनारे उगी झाड़ियों, घास और अन्य वनस्पतियों की कटाई कर मार्गों को साफ किया, जिससे आवाजाही सुरक्षित और सुगम हो सके। इस अभियान में गांव के विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की और सामुदायिक सहयोग का परिचय दिया।
वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता आशुतोष शाही ने बताया कि ग्रामीणों का यह प्रयास केवल सफाई अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यदि समाज के लोग इसी प्रकार अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए आगे आएं तो कई समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही किया जा सकता है। उन्होंने ग्रामीणों के उत्साह और सहयोग की सराहना करते हुए इसे अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक बताया।
हालांकि ग्रामीणों ने स्वयं पहल कर समस्या का समाधान करने का प्रयास किया है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कों के किनारे नियमित रूप से झाड़ी कटान और सफाई का दायित्व संबंधित विभागों, विशेषकर लोक निर्माण विभाग और स्थानीय प्रशासन का है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विभाग समय-समय पर ऐसे अभियान चलाएं ताकि सड़क दुर्घटनाओं की संभावना कम हो और वन्यजीवों से होने वाले खतरे को भी नियंत्रित किया जा सके।
ग्रामीणों की इस पहल की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है। लोगों का मानना है कि सामूहिक श्रमदान और जनसहभागिता से न केवल क्षेत्र की समस्याओं का समाधान संभव है, बल्कि सामाजिक एकता और जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होती है।







