पर्वतीय विद्यार्थियों तक आधुनिक प्रयोगशाला की पहुंच: रानीखेत महाविद्यालय में दूसरी वर्चुअल लैब कार्यशाला
IIT बॉम्बे के सहयोग से रसायन विज्ञान विभाग की पहल, विद्यार्थियों ने स्वयं किए वर्चुअल प्रयोग; वैज्ञानिक अवधारणाओं और परिणामों पर हुआ संवाद
रानीखेत। पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक, तकनीक आधारित और गुणवत्तापूर्ण प्रयोगात्मक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत के रसायन विज्ञान विभाग द्वारा दूसरी वर्चुअल लैब कार्यशाला का आयोजन किया गया। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रयोगों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया गया।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने केवल वर्चुअल प्रयोगों का प्रदर्शन नहीं देखा, बल्कि स्वयं विभिन्न प्रयोगों को संचालित किया। उन्होंने प्रयोगों के सिद्धांत, प्रक्रिया, विभिन्न पैरामीटर में बदलाव के प्रभाव, प्राप्त परिणामों के विश्लेषण तथा उनके व्यावहारिक उपयोग के संबंध में शिक्षकों के साथ विस्तार से चर्चा की। इस कारण पूरी कार्यशाला संवादात्मक, प्रयोगात्मक और विद्यार्थी-केंद्रित रही।
विभिन्न विषयों से जुड़े प्रयोगों का किया अभ्यास
कार्यशाला में केमिकल साइंसेज, इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री, फिजिकल केमिस्ट्री, ऑर्गेनिक केमिस्ट्री, बायोकेमिस्ट्री तथा मॉलिक्यूलर स्पेक्ट्रोस्कोपी से संबंधित अनेक वर्चुअल प्रयोग विद्यार्थियों ने किए।
प्रमुख प्रयोगों में पोलरिमीटर की सहायता से शर्करा का विशिष्ट घूर्णन, एसिड-बेस टाइट्रेशन, क्रिस्टल फील्ड थ्योरी, कार्बनिक विलायकों की श्यानता, फंक्शनल ग्रुप एवं तत्वों की पहचान, ग्लूकोज का आकलन, दूध में मिलावट की पहचान तथा UV-Visible Absorption Spectroscopy शामिल रहे।
वर्चुअल लैब के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रयोगों को दोहराने, विभिन्न परिस्थितियों में उनके परिणामों का अवलोकन करने तथा वैज्ञानिक अवधारणाओं को अधिक स्पष्टता के साथ समझने का अवसर मिला।
वैज्ञानिक सोच विकसित करने में उपयोगी है वर्चुअल लैब
रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. प्रसून जोशी ने कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके साथ प्रयोगात्मक अनुभव भी आवश्यक है। वर्चुअल लैब कठिन वैज्ञानिक अवधारणाओं को प्रयोगों के माध्यम से सरल एवं प्रभावी ढंग से समझने में मदद करती है।
उन्होंने कहा कि इसकी एक बड़ी विशेषता यह है कि विद्यार्थी आवश्यकता के अनुसार किसी प्रयोग का बार-बार अभ्यास कर सकते हैं। विभाग का प्रयास है कि विद्यार्थियों को पारंपरिक प्रयोगशाला के साथ-साथ आधुनिक डिजिटल शिक्षण संसाधनों का भी अधिकतम लाभ मिले।
पर्वतीय विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण पहल
महाविद्यालय के वर्चुअल लैब नोडल अधिकारी डॉ. भारत पांडे ने कहा कि रानीखेत और आसपास के ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए इस पहल का विशेष महत्व है। भौगोलिक परिस्थितियों अथवा महंगे और विशिष्ट प्रयोगशाला उपकरणों की सीमित उपलब्धता के कारण किसी विद्यार्थी का प्रयोगात्मक ज्ञान सीमित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्चुअल लैब डिजिटल माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक वैज्ञानिक प्रयोगों तक पहुंच उपलब्ध कराती है। दूसरी वर्चुअल लैब कार्यशाला इसी दिशा में निरंतर प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य इसे केवल एक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों की नियमित प्रयोगात्मक शिक्षा से जोड़ना है, ताकि उनमें वैज्ञानिक जिज्ञासा, डिजिटल दक्षता और शोध के प्रति रुचि विकसित हो सके।
विद्यार्थियों को प्रयोगों की चरणबद्ध प्रक्रिया समझाई
रसायन विज्ञान विभाग की वर्चुअल लैब विभागीय समन्वयक डॉ. निधि शर्मा ने विद्यार्थियों को वर्चुअल लैब प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और विभिन्न प्रयोगों को चरणबद्ध तरीके से करने की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने प्रयोग के दौरान विभिन्न पैरामीटर, किए जाने वाले अवलोकन और प्राप्त परिणामों के वैज्ञानिक विश्लेषण के संबंध में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
उनके निर्देशन में विद्यार्थियों ने स्वयं प्रयोग किए और प्रयोगों से संबंधित अपनी जिज्ञासाओं एवं सवालों पर चर्चा कर समाधान प्राप्त किया। इससे विद्यार्थियों को वैज्ञानिक प्रक्रिया को समझने के साथ-साथ डिजिटल माध्यम से प्रयोग करने का व्यावहारिक अनुभव भी मिला।
शिक्षकों ने विद्यार्थियों को किया प्रेरित
कार्यशाला में जंतु विज्ञान विभाग के डॉ. अतुल उप्रेती सहित अन्य प्राध्यापक भी उपस्थित रहे। शिक्षकों ने विद्यार्थियों के साथ विभिन्न प्रयोगों और उनके परिणामों पर चर्चा की। साथ ही उन्हें डिजिटल संसाधनों का उपयोग नियमित अध्ययन, प्रयोगात्मक अभ्यास और वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ाने के लिए करने के लिए प्रेरित किया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडे ने दूसरी वर्चुअल लैब कार्यशाला के सफल आयोजन पर वर्चुअल लैब नोडल अधिकारी डॉ. भारत पांडे, विभागीय समन्वयक डॉ. निधि शर्मा, विभागाध्यक्ष डॉ. प्रसून जोशी तथा रसायन विज्ञान विभाग की पूरी टीम को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित उच्च शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को आधुनिक डिजिटल और प्रयोगात्मक संसाधनों से जोड़ना गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी उच्च शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, डिजिटल दक्षता, जिज्ञासा, नवाचार और शोध अभिरुचि विकसित करने में सहायक होती हैं।
प्राचार्य ने कहा कि ऐसी गतिविधियों की निरंतरता विद्यार्थियों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा विकसित शैक्षणिक संसाधनों से जोड़ने के साथ ही ICT आधारित शिक्षण-अधिगम और विद्यार्थी-केंद्रित प्रयोगात्मक शिक्षा को भी बढ़ावा देती है।
कार्यशाला में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। स्वयं प्रयोग करने और उसके बाद शिक्षकों के साथ परिणामों पर चर्चा करने से विद्यार्थियों को विषय की अवधारणाओं को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिला। रसायन विज्ञान विभाग की दूसरी वर्चुअल लैब कार्यशाला पर्वतीय एवं ग्रामीण विद्यार्थियों तक आधुनिक वैज्ञानिक प्रयोगशाला की पहुंच बढ़ाने तथा महाविद्यालय में तकनीक-सक्षम प्रयोगात्मक शिक्षण की सतत संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।







