रानीखेत में पात्र मतदाताओं के खिलाफ झूठी आपत्तियों पर सख्त कार्रवाई की मांग, कांग्रेस ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन।
रानीखेत कांग्रेस ने संयुक्त मजिस्ट्रेट के माध्यम से डीएम अल्मोड़ा को भेजा ज्ञापन, गलत व दुर्भावनापूर्ण आपत्तियों पर कार्रवाई की मांग; कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
रिपोर्ट- बलवन्त सिंह रावत
रानीखेत। रानीखेत विधानसभा क्षेत्र में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान पात्र मतदाताओं के नामों के खिलाफ दर्ज की जा रही आपत्तियों को लेकर रानीखेत कांग्रेस कमेटी ने कड़ा रुख अपनाया है।
कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संयुक्त मजिस्ट्रेट के माध्यम से जिलाधिकारी अल्मोड़ा को ज्ञापन भेजकर आपत्तियों की निष्पक्ष जांच कराने तथा गलत और भ्रामक शिकायतों के आधार पर किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाने की मांग की है।
रानीखेत कांग्रेस कमेटी के कैम्प कार्यालय स्प्रींग फील्ड से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि किसी भी वैध मतदाता का नाम राजनीतिक दुर्भावना, गलत सूचना अथवा बिना पर्याप्त सत्यापन के मतदाता सूची से बाहर न किया जाए। कांग्रेस ने प्रशासन से सभी आपत्तियों की निष्पक्षता और तथ्यों के आधार पर जांच कराने की मांग की।
कांग्रेस ने ज्ञापन में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण या संशोधन से संबंधित प्रक्रिया में जानबूझकर झूठा बयान या गलत घोषणा करना दंडनीय है। पार्टी ने मांग की कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर गलत अथवा भ्रामक आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए।
राजनीतिक दुर्भावना से नाम हटाने का लगाया आरोप
नगरपालिका अध्यक्ष अरुण रावत ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान सभी मतदाताओं के नाम दर्ज किए जा रहे थे, लेकिन इसके बाद प्रारूप-7 के माध्यम से कुछ मतदाताओं के नामों पर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। उनका आरोप है कि इन आपत्तियों के चलते कई लोगों के नाम हटाने का प्रयास किया गया है।
अरुण रावत ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विशेष वर्गों को ध्यान में रखते हुए लोगों के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है और इसमें कई युवा मतदाता भी शामिल हैं, जिन्हें उनके मताधिकार से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग केवल इतनी है कि यदि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर गलत और भ्रामक आपत्ति दर्ज कराई है तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने मामले में कार्रवाई नहीं की तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
मतदाता ने भी कार्रवाई की मांग उठाई
मतदाता दानिश ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा उनके सहित अन्य मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में भाजपा के भरत भूषण का नाम सामने आया है। दानिश ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की, ताकि पात्र मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।
निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता पर जोर
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची से किसी भी नाम को हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति की पात्रता और दस्तावेजों का उचित सत्यापन किया जाना चाहिए। पार्टी ने प्रशासन से मांग की कि SIR के दौरान दर्ज सभी आपत्तियों की जांच पारदर्शी तरीके से कराई जाए और यदि किसी शिकायत के पीछे राजनीतिक दुर्भावना या गलत सूचना पाई जाती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाए।
कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और शुद्धता बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। साथ ही पात्र नागरिकों के मताधिकार की रक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पार्टी ने चेताया कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया तो कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर व्यापक आंदोलन करेगी।







