“एपस्टीन फाइल्स” : 30 लाख पेज के दस्तावेज़ों ने उजागर किये विश्व के दिग्गजों के नाम, इस्तीफों और जांचों का दौर शुरू
दुनियाभर के नेताओं, पूंजीपतियों और शीर्ष ब्यूरोक्रेट्स के काले चिट्ठे एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इन खुलासों की धुरी में एक ही नाम हर जगह गूंज रहा है—जैफरी एपस्टीन।
जेल में संदिग्ध हालात में हुई उसकी मौत के बाद भले ही वह शख्स मौजूद न हो, लेकिन उसकी तैयार की गई फाइलें आज भी दुनिया के ताकतवर लोगों के लिए डर का कारण बनी हुई हैं। ये फाइलें अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा सार्वजनिक की गई हैं।
अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने 30 जनवरी को करीब 30 लाख पेज के दस्तावेज जारी किए। इन दस्तावेजों के सामने आते ही वैश्विक स्तर पर हड़कंप मच गया। शुरुआती चरण में ही 10 देशों में 15 से अधिक बड़े अधिकारियों को पद छोड़ना पड़ा, जबकि 80 से ज्यादा प्रभावशाली लोगों पर जांच शुरू हो चुकी है। इन फाइलों में नेता, राजदूत, अरबपति और शाही परिवारों से जुड़े नाम शामिल बताए जा रहे हैं। ईमेल, फ्लाइट लॉग और संपर्क रिकॉर्ड में 700 से 1000 प्रभावशाली हस्तियों का जिक्र है, जिनमें से कई एक-एक कर इस्तीफे दे रहे हैं।
यूरोप में सबसे ज्यादा असर
एपस्टीन फाइल्स के खुलासों के बाद सबसे ज्यादा हलचल यूरोप में देखने को मिल रही है। करीब 10 देशों में राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया है।
ब्रिटेन में तीन वरिष्ठ अधिकारियों को पद छोड़ना पड़ा। इनमें पूर्व राजदूत पीटर मैंडेलसन, सलाहकार एडम पेरी और प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी शामिल हैं।
स्लोवाकिया में पूर्व विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मीरोस्लाव लाइचाक ने 300 से अधिक ईमेल और आपत्तिजनक चैट सामने आने के बाद इस्तीफा दे दिया।
स्वीडन की सीनियर डिप्लोमेट जोआना रुबिनस्टीन ने पद छोड़ा।
नॉर्वे की राजदूत मोना जूल, अमेरिका में लेबर मिनिस्टर रहे एलेक्स एकोस्टा और MIT लैब के प्रमुख जोइची इतो ने भी इस्तीफा दिया।
इन खुलासों ने कई देशों की सरकारों को शर्मिंदगी में डाल दिया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी, जबकि प्रिंस एंड्रयू के खिलाफ ब्रिटिश पुलिस ने नई फाइलों के आधार पर फ्रेश रिव्यू शुरू किया है।
नॉर्वे में राजदूत मोना जूल को निलंबित कर दिया गया है और पूर्व प्रधानमंत्री थोरबजॉर्न जगलैंड के खिलाफ भ्रष्टाचार जांच शुरू हुई है। सीनियर डिप्लोमेट तेर्झे रोड-लार्सन भी जांच के दायरे में हैं।
फ्रांस में भी सियासी भूचाल
फ्रांस में भी एपस्टीन फाइल्स ने बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। पूर्व संस्कृति मंत्री जैक लैंग ने अरब वर्ल्ड इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। फाइलों में उनका नाम 673 बार सामने आया है, जिसमें 2012 से 2019 तक एपस्टीन के साथ ईमेल और संपर्कों का उल्लेख है।
हालांकि जैक लैंग ने आरोपों को निराधार बताया है, लेकिन उनके खिलाफ फ्रांस में वित्तीय जांच शुरू हो चुकी है। उनकी बेटी कैरोलाइन लैंग, जो एक फिल्म प्रोड्यूसर्स ग्रुप की प्रमुख थीं, ने भी पद छोड़ दिया है।
अन्य देशों में जांच तेज
पोलैंड, लातविया और तुर्किये ने मानव तस्करी और सरकारी साठगांठ की जांच के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। जस्टिस डिपार्टमेंट की ओर से जारी कुछ तस्वीरों ने भी विवाद को और हवा दी है, जिनमें प्रिंस एंड्रयू को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस मेटे-मारिट के ईमेल और संवाद सामने आने के बाद राजशाही स्तर पर संस्थागत समीक्षा हुई और उन्हें सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी।
माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने एपस्टीन से हुई मुलाकातों पर अफसोस जताते हुए अपने फाउंडेशन बोर्ड से इस्तीफा दे दिया।
इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री एहुद बराक का नाम न्यूयॉर्क में एपस्टीन के अपार्टमेंट में ठहरने और बैठकों के रिकॉर्ड में सामने आया, जिसके बाद उन्हें सफाई देनी पड़ी।
ट्रम्प पर भी नजरें
एपस्टीन फाइल्स में डोनाल्ड ट्रम्प का नाम भी कई बार दर्ज है। बताया जा रहा है कि उनका नाम फाइलों में 38 हजार से अधिक बार आया है, जिसमें 7–8 यात्राओं का भी उल्लेख है।
ट्रम्प और एपस्टीन की करीबी दोस्ती के किस्से पहले से ही सार्वजनिक रहे हैं। हालांकि इन खुलासों के बावजूद ट्रम्प अब तक अपने रुख पर कायम नजर आ रहे हैं।
एपस्टीन फाइल्स के ये खुलासे आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और सत्ता के गलियारों में और बड़े भूचाल का संकेत दे रहे हैं।




















