भीमताल विधानसभा क्षेत्र में सोलर लाइट वितरण को लेकर राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरू ने उठाई आवाज, जन शिकायतों के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग
भीमताल। भीमताल विधानसभा क्षेत्र में वितरित की जा रही सोलर लाइटों को लेकर राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरू ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पनेरू का कहना है कि क्षेत्र के विभिन्न गांवों से उन्हें सोलर लाइट वितरण को लेकर लगातार जन शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। शिकायतों में आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ स्थानों पर योजना का लाभ पात्रता और आवश्यकता के आधार पर देने के बजाय कथित राजनीतिक पसंद-नापसंद के आधार पर दिए जाने की स्थिति सामने आ रही है।
हरीश पनेरू ने कहा कि यदि सरकारी योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों को सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश सुविधा उपलब्ध कराना है, तो इसका लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पहुंचना चाहिए। किसी भी सरकारी योजना में लाभार्थी का चयन राजनीतिक समर्थन अथवा विरोध के आधार पर नहीं होना चाहिए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी गांव में करीब 200 परिवार रहते हैं और उनमें से केवल कुछ चुनिंदा परिवारों को ही सोलर लाइट उपलब्ध कराई जाती है, जबकि अन्य पात्र परिवारों को किसी राजनीतिक कारण से लाभ से वंचित रखा जाता है, तो यह गंभीर जांच का विषय है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सामने आ रही शिकायतों की वास्तविकता का निर्धारण संबंधित विभागीय जांच और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
‘सरकारी योजना किसी दल या समर्थक की निजी संपत्ति नहीं’
पनेरू ने कहा कि सरकारी योजनाएं जनता के टैक्स और सार्वजनिक धन से संचालित होती हैं। इसलिए इनका लाभ किसी राजनीतिक दल, जनप्रतिनिधि या समर्थक वर्ग की निजी संपत्ति नहीं हो सकता। योजनाओं का लाभ पात्रता, आवश्यकता और निर्धारित सरकारी मानकों के आधार पर प्रत्येक नागरिक तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी योजना के लाभार्थी चयन में वास्तव में राजनीतिक पक्षधरता या भेदभाव पाया जाता है तो यह न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करेगा, बल्कि सुशासन और समान अवसर की भावना को भी प्रभावित करेगा।
लाभार्थियों की सूची और चयन प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग
राज्य आंदोलनकारी ने मांग की कि संबंधित विभाग द्वारा सोलर लाइट योजना के तहत चयनित लाभार्थियों की सूची, पात्रता के मानक, चयन प्रक्रिया और वितरण का आधार सार्वजनिक किया जाए। साथ ही प्रत्येक गांव में कितने परिवारों को योजना का लाभ दिया गया और कितने पात्र परिवार अभी लाभ से वंचित हैं, इसका भी स्पष्ट विवरण सामने आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है तो लाभार्थियों की सूची और चयन के मानकों को सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
लाइव कार्यक्रम में जनता के सामने रखेंगे तथ्य
हरीश पनेरू ने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर उन्हें प्राप्त जन शिकायतों और उपलब्ध तथ्यों को संकलित किया जा रहा है। शीघ्र ही एक लाइव कार्यक्रम के माध्यम से वह इस मुद्दे को जनता के सामने रखेंगे और संबंधित विषय पर अपना पक्ष प्रस्तुत करेंगे।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को राजनीतिक रूप से निशाना बनाना नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और पात्र नागरिकों को उनका अधिकार सुनिश्चित कराना है।
‘भेदभाव सिद्ध हुआ तो लोकतांत्रिक तरीके से होगा विरोध’
पनेरू ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में सोलर लाइट वितरण में किसी प्रकार का पक्षपात, पूर्वाग्रह या राजनीतिक आधार पर भेदभाव प्रमाणित होता है तो इसके खिलाफ लोकतांत्रिक एवं वैधानिक माध्यमों से आवाज उठाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग जनहित में होना चाहिए और किसी भी पात्र नागरिक को केवल राजनीतिक विचारधारा अथवा किसी जनप्रतिनिधि के समर्थन या विरोध के कारण सरकारी सुविधा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
अब इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि सोलर लाइट वितरण के लिए लाभार्थियों का चयन किन मानकों पर किया गया है, चयन प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और सामने आ रही जन शिकायतों में कितनी सच्चाई है। इन सवालों का स्पष्ट उत्तर संबंधित विभागीय अभिलेखों और निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।







