दिल्ली के पालम में हुए दर्दनाक अग्निकांड के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए गुरुवार को आयोजित शोकसभा उस समय हंगामे में बदल गई, जब भाजपा और आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। शोक और संवेदना का माहौल अचानक सियासी टकराव में तब्दील हो गया।
स्थानीय लोगों द्वारा आयोजित इस सभा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। हादसे के शोक में दुकानदारों ने सुबह से ही अपने प्रतिष्ठान बंद रखे थे। दोपहर करीब तीन बजे शुरू हुई शांति सभा में आप नेताओं सौरभ भारद्वाज, जरनैल सिंह और कुलदीप कुमार के साथ पालम से भाजपा विधायक कुलदीप सोलंकी भी मौजूद थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विवाद तब शुरू हुआ जब आप नेताओं ने विधायक को अपने पास बुलाया और अग्निकांड को लेकर दिल्ली सरकार की जिम्मेदारी पर सवाल-जवाब शुरू हो गए। इसी दौरान एक टिप्पणी पर माहौल गर्मा गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस के बाद धक्का-मुक्की होने लगी।
स्थिति उस समय और भावुक हो गई जब इस हादसे में अपने परिवार के 9 सदस्यों को खो चुके राजेंद्र कश्यप खुद ही नेताओं के बीच विवाद शांत कराने की कोशिश करते नजर आए। अफरा-तफरी में वह भी भीड़ के बीच फंस गए और कुछ देर के लिए उनकी हालत बिगड़ गई। स्थानीय लोगों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। मौके पर मौजूद पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को काबू में किया।
इस घटना के बाद सियासी आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर बदसलूकी का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने से रोका गया और कुर्सियां फेंकी गईं। उन्होंने घटना के लिए सरकारी लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए फायर ब्रिगेड की देरी और तकनीकी खामियों पर सवाल उठाए तथा निष्पक्ष जांच की मांग की।
वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आप नेता जांच को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि आग ज्वलनशील पदार्थों के अवैध भंडारण के कारण तेजी से फैली और कुछ लोगों की मौत फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी।
फिलहाल, इस दर्दनाक हादसे पर शोक जताने के लिए आयोजित सभा सियासी विवाद की भेंट चढ़ गई, जबकि पीड़ित परिवार न्याय और जवाबदेही की उम्मीद में हैं।

