कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत पहुचे रानीखेत,तहसील कार्यालय व उप निबंधक कार्यालय का किया औचक निरीक्षण।
रिपोर्ट- बलवन्त सिंह रावत
रानीखेत। कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत अपने अल्मोड़ा भ्रमण के दूसरे दिन रानीखेत पहुचें। सयुंक्त मजिस्ट्रेट गौरी प्रभात ने पुष्प गुच्छ भेट कर उनका स्वागत किया। तत्पश्चात कुमाऊँ आयुक्त ने तहसील कोर्ट का निरीक्षण किया।
बता दे कि कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने रानीखेत पहुचकर तहसील और उप निबंधक कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान तहसील कार्यालय में रखे पुराने अभिलेखों की स्थिति का परीक्षण किया गया तथा अभिलेखों के सुव्यवस्थित रूप से संरक्षण की समीक्षा की गई। वही तहसील न्यायालय में दायर वादों की विस्तार से समीक्षा करते हुए कई प्रकरणों के लंबे समय से लंबित पाए जाने पर नाराजगी व्यक्त की।
वही कुमाऊँ आयुक्त ने निरीक्षण के दौरान एक प्रकरण में फाइल पर अनावश्यक आपत्ति लगाए जाने को गंभीरता से लेते हुए संबंधित नायब तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। तत्पश्चात उन्होंने उप निबंधक कार्यालय एवं संयुक्त मजिस्ट्रेट कार्यालय का भी निरीक्षण किया।
आयुक्त ने अभिलेख संधारण, जनसुनवाई व्यवस्था तथा लंबित मामलों की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी विभागों को कार्यप्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने बताया कि लोगों के रोज़ रोज़ के काम पड़ते हैं, विशेषकर जमीनों के दाखिल खारिज के मामले हो, या 143 हो। माननीय मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की ओर से भी इस बात पर जोर दिया गया कि इन मामलों का निस्तारण उचित समय में होना चाहिए और इसमें पूरी पारदर्शिता भी होनी चाहिए। इसी विषय में आज मैने सबसे पहले तहसील कोर्ट का निरीक्षण किया।
इसमें जो मामले 2 साल से ज्यादा पुराने हैं, ऐसे 6, 7 मामले सामने आये हैं। जिनको मुझे लगता है कि और जल्दी किया जा सकता था। उन्होने कहा कि तहसीलदार को निर्देश दिए है कि अगले 45 से 60 दिन के बीच निस्तारित कर दे, किसी भी मामले में अनावश्यक तिथि देना उचित नहीं है, क्योंकि आवेदक को अगर समय से न्याय नहीं मिलता तो इसका कोई फायदा नहीं है।
143 वाले मामले में भी मैने निर्देश दिए है कि जब कोई आवेदन होता है, चाहे एसडीएम ऑफिस में, फिर वो चाहे तहसीलदार स्तर पर हो, हमें पता होना चाहिए कहां पे लंबित है और उसका आंकन भी इस प्रकार से हो कि जिम्मेदारी भी तय हो सके। कुछ मामलों में मुझे लगता है कि लापरवाही है, उनमें मुझे लगता है कि जो सम्बंधित नायब तहसीलदार साहब है, उनका स्पष्टीकरण प्राप्त करेंगे।
उसके बाद सब रजिस्ट्रार ऑफिस को भी मैने देखा लगभग 5, 6 रजिस्ट्री औसतन दिन भर में हो रही है। मैं देख रहा था कि जो मूल रजिस्ट्री है वो समय से वापस हो रही है या नहीं, उसके रिकॉर्ड में मैने पाया कि काम संतोषजनक तरीके से हो रहा है।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र, सयुंक्त मजिस्ट्रेट गौरी प्रभात, तहसीलदार दीपिका आर्या, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी दीप जोशी, पेशकार संतोष उपाध्याय, नितीन बिष्ट सहित तहसील कर्मचारीगण उपस्थित रहे।




















