जंतर-मंतर धरने में पहुंचा उत्तराखंड पुलिस कांस्टेबल, इस गैंग से संबंधों के आरोप में जा चुका है जेल…

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उत्तराखंड पुलिस का निलंबित कांस्टेबल शेर सिंह भूमि विवाद में गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि गिरोह से मिलीभगत के आरोप में 2025 में हुई थी गिरफ्तारी, जांच के बाद किया गया था निलंबित

हरिद्वार। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित धरने में उत्तराखंड पुलिस का निलंबित कांस्टेबल शेर सिंह दिखाई देने के बाद वह एक बार फिर चर्चा में आ गया है। शेर सिंह हरिद्वार जिले के जटबहादरपुर गांव का निवासी है और वर्ष 2025 में गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि गिरोह से कथित संबंधों के मामले में एसटीएफ की कार्रवाई के बाद गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है।

जानकारी के अनुसार, सितंबर 2025 में उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने भूमि विवाद से जुड़े एक मामले में कांस्टेबल शेर सिंह और कांस्टेबल हसन जैदी को गिरफ्तार किया था। दोनों पर आरोप था कि उन्होंने कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के गिरोह के साथ मिलीभगत कर पीड़ित पक्ष को धमकाया और विवादित संपत्ति बेचने के लिए दबाव बनाया। कार्रवाई के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

बताया गया कि दोनों कांस्टेबलों का तबादला कुमाऊं रेंज में किया गया था। एसटीएफ की जांच के दौरान उनके वाल्मीकि गैंग से कथित संबंधों के साक्ष्य सामने आने पर विभागीय कार्रवाई भी की गई और उन्हें निलंबित कर दिया गया।

दरअसल, वर्ष 2025 में एसटीएफ ने गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि गिरोह के खिलाफ मिली गोपनीय सूचनाओं के आधार पर रुड़की के पार्षद मनीष बॉलर, पंकज जायसवाल (कुछ अभिलेखों में पंकज अष्टवाल का भी उल्लेख) समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। मनीष बॉलर, प्रवीण वाल्मीकि का भतीजा बताया जाता है।

27 अगस्त 2025 को एसटीएफ ने मनीष बॉलर और पंकज जायसवाल को गिरफ्तार किया था। पूछताछ और आगे की जांच में कांस्टेबल शेर सिंह और हसन जैदी के नाम सामने आए। जांच एजेंसी का दावा था कि दोनों पुलिसकर्मी वाल्मीकि और मनीष बॉलर के गिरोह के संपर्क में थे तथा गिरोह के प्रभाव का इस्तेमाल कर भूमि विवादों में हस्तक्षेप करते थे।

अब जंतर-मंतर पर धरने में शेर सिंह की मौजूदगी के बाद उसका नाम फिर सुर्खियों में आ गया है। हालांकि, धरने में उसकी मौजूदगी को लेकर पुलिस या प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, उसके खिलाफ दर्ज प्रकरण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

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