रानीखेत में जल-जनित रोगों की रोकथाम को लेकर आशा कार्यकर्ताओं की समीक्षा बैठक आयोजित।
रिपोर्टर — बलवन्त सिंह रावत
रानीखेत। मानसून और उसके बाद फैलने वाले जल-जनित एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम को लेकर स्वर्गीय गोविंद सिंह माहरा राजकीय चिकित्सालय रानीखेत में आशा कार्यकर्ताओं की एक महत्वपूर्ण समीक्षा एवं संवेदीकरण बैठक आयोजित की गई। बैठक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. दीप प्रकाश पार्की के कुशल निर्देशन में संपन्न हुई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान और उसके बाद जल-जनित संक्रामक रोगों की समय रहते पहचान, रोकथाम तथा प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना रहा। स्वास्थ्य विभाग ने आशा कार्यकर्ताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतते हुए संभावित मरीजों की सक्रिय निगरानी करने के निर्देश दिए।
बैठक का संचालन करते हुए पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. दीपक शर्मा ने मानसून के मौसम में पनपने वाली बीमारियों और उनसे बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया कि वे अपने आवंटित गांवों और तोकों में उल्टी-दस्त (डायरिया), पेचिश, हैजा, पीलिया अर्थात वायरल हेपेटाइटिस तथा टायफाइड जैसे रोगों के संभावित लक्षणों वाले मरीजों की तत्काल पहचान करें।
डॉ. शर्मा ने कहा कि यदि किसी गांव या तोक में एक साथ कई लोगों के बीमार पड़ने की स्थिति सामने आती है, तो इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल अस्पताल प्रशासन और संबंधित उच्चाधिकारियों को सूचना दी जाए। समय पर सूचना मिलने से रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) को मौके पर भेजकर बीमारी के फैलाव को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।
ORS, दवाएं और क्लोरीन टैबलेट रखने के निर्देश
आपातकालीन परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी आशा कार्यकर्ताओं को अपने पास पर्याप्त मात्रा में ओआरएस पैकेट, आवश्यक दवाएं तथा पेयजल शुद्धिकरण के लिए क्लोरीन टैबलेट उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए।
बैठक में स्वच्छ पेयजल और व्यक्तिगत स्वच्छता को जल-जनित बीमारियों की रोकथाम का सबसे महत्वपूर्ण उपाय बताया गया। आशा कार्यकर्ताओं से कहा गया कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पानी उबालकर और छानकर पीने के लिए लगातार जागरूक करें।
नौलों-धारों और पेयजल टंकियों की सफाई पर विशेष जोर
बैठक में स्थानीय प्राकृतिक जलस्रोतों, नौलों-धारों तथा पेयजल टंकियों की नियमित सफाई और निगरानी पर विशेष जोर दिया गया। जल संस्थान के साथ समन्वय स्थापित कर समय-समय पर पेयजल स्रोतों का क्लोरीनेशन कराने तथा आवश्यक स्थानों पर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव सुनिश्चित करने की बात कही गई।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने खाद्य स्वच्छता के प्रति भी ग्रामीणों को जागरूक करने का आह्वान किया। लोगों को ताजा और गर्म भोजन करने, खुले एवं बासी खाद्य पदार्थों के सेवन से बचने तथा भोजन और पानी की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई।
टीबी की पहचान और उपचार की भी दी जानकारी
बैठक के दौरान टीबी सुपरवाइजर गोविंद सिंह ने आशा कार्यकर्ताओं को क्षय रोग यानी टीबी के लक्षणों, समय पर पहचान और उपचार के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टीबी के संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर मरीजों को शीघ्र जांच और उपचार के लिए स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने में आशा कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।
सर्पदंश से बचाव के लिए पोस्टर वितरित
ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाओं को देखते हुए आशा कार्यकर्ताओं को सांप के काटने से बचाव और प्राथमिक स्तर पर जागरूकता फैलाने के लिए जानकारीपरक पोस्टर भी वितरित किए गए। आशा कार्यकर्ताओं से कहा गया कि वे अपने क्षेत्रों में लोगों को सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचने के प्रति जागरूक करें।
बैठक में क्षेत्र की सभी आशा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। स्वास्थ्य विभाग ने आशा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मानसून के दौरान गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहली कड़ी के रूप में सतर्क रहकर बीमारी के किसी भी संभावित प्रकोप की सूचना तत्काल उपलब्ध कराएं, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
रानीखेत में आयोजित यह बैठक मानसून जनित बीमारियों की रोकथाम और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य निगरानी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।





