वैश्विक शोध से पहाड़ की कक्षाओं तक: डॉ. निधि शर्मा की उपलब्धियों में जुड़ा नया अध्याय
रानीखेत। प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्चस्तरीय शोध अनुभव हासिल करने के बाद उसी ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को पर्वतीय क्षेत्र के विद्यार्थियों तक पहुंचाने का कार्य कर रहीं राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत के रसायन विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. निधि शर्मा की अकादमिक उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है।
शिक्षा, शोध, नवाचार एवं अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें ‘Education Excellence Award–2026’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें I2OR–Nation Builder Award 2026 के अंतर्गत प्रदान किया गया।
डॉ. शर्मा की उपलब्धि इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि उनकी वैज्ञानिक यात्रा देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान IIT मद्रास से लेकर इजराइल के Ben-Gurion University of the Negev और IIT रुड़की तक रही है। आज वे इसी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध अनुभव का लाभ रानीखेत के विद्यार्थियों को दे रही हैं और उन्हें आधुनिक विज्ञान, प्रयोगात्मक शिक्षा, शोध एवं नवाचार से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।
पंतनगर से शुरू हुई उच्च शिक्षा की यात्रा
डॉ. निधि शर्मा ने रसायन विज्ञान में उच्च शिक्षा की शुरुआत गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर से की, जहां से उन्होंने रसायन विज्ञान में एमएससी की उपाधि प्राप्त की। विज्ञान के प्रति गहरी रुचि और शोध के प्रति लगाव ने उन्हें उच्चस्तरीय अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की। CSIR-NET JRF (Chemical Sciences) में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 60वीं रैंक प्राप्त की। इसके साथ ही उन्होंने GATE परीक्षा भी उत्तीर्ण की। इन उपलब्धियों ने उनके शोध करियर की मजबूत नींव तैयार की।
IIT मद्रास में किया आधुनिक रसायन विज्ञान पर शोध
उच्च शिक्षा के अगले चरण में उनका चयन देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) में पीएच.डी. के लिए हुआ। यहां उन्होंने आधुनिक कार्बनिक एवं उत्प्रेरक रसायन विज्ञान से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर शोध किया।
उनके शोध कार्य में पैलेडियम नैनोपार्टिकल्स, कार्बोनाइलेशन तथा ऑक्सीडेटिव एनुलेशन जैसी आधुनिक संश्लेषण विधियां प्रमुख रहीं। इन क्षेत्रों का संबंध नवीन रासायनिक प्रक्रियाओं, प्रभावी उत्प्रेरकों तथा उपयोगी कार्बनिक यौगिकों के निर्माण से है।
IIT मद्रास में उनके शोध की गुणवत्ता को भी विशेष पहचान मिली। उत्कृष्ट पीएच.डी. थीसिस के लिए उन्हें प्रतिष्ठित Prof. G. Sundararajan Endowment Prize प्रदान किया गया। यह सम्मान उनकी वैज्ञानिक क्षमता और शोध के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।
शोध यात्रा पहुंची इजराइल तक
पीएच.डी. पूरी करने के बाद डॉ. शर्मा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध करने का अवसर मिला। उन्होंने Ben-Gurion University of the Negev, Israel में Kreitman Post-Doctoral Research Fellow के रूप में कार्य किया।
इजराइल के अंतरराष्ट्रीय शोध वातावरण में काम करने के दौरान उन्हें अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, आधुनिक शोध पद्धतियों और वैश्विक स्तर पर विकसित हो रहे वैज्ञानिक दृष्टिकोणों के साथ कार्य करने का अनुभव मिला। यह चरण उनकी वैज्ञानिक यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा।
इसके बाद भारत लौटकर उन्होंने IIT रुड़की के रसायन विज्ञान विभाग में SERB-National Post-Doctoral Fellow के रूप में भी शोध कार्य किया। इस प्रकार उनकी शोध यात्रा में पंतनगर, IIT मद्रास, Ben-Gurion University और IIT रुड़की जैसे प्रतिष्ठित संस्थान जुड़े।
अब रानीखेत के विद्यार्थियों तक पहुंचा रहीं शोध का अनुभव
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में शोध अनुभव प्राप्त करने के बाद डॉ. निधि शर्मा वर्तमान में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत में रसायन विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।
पर्वतीय क्षेत्र में स्थित महाविद्यालय में उनका योगदान केवल नियमित अध्यापन तक सीमित नहीं है। वे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, प्रयोगात्मक समझ, शोध के प्रति रुचि और नवाचार की भावना विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रही हैं।
उनका प्रयास है कि पर्वतीय क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी आधुनिक विज्ञान और तकनीक के उन अवसरों से जोड़ा जाए, जो सामान्यतः बड़े शहरों अथवा अत्याधुनिक संस्थानों में आसानी से उपलब्ध होते हैं।
Virtual Lab के माध्यम से आधुनिक प्रयोगात्मक शिक्षा
डॉ. शर्मा महाविद्यालय में Departmental Coordinator, Virtual Lab (Chemistry) की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। IIT Bombay से जुड़े Virtual Lab कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से विभिन्न प्रयोगों और प्रयोगशाला की अवधारणाओं को समझने का अवसर मिल रहा है।
पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अत्याधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं तक नियमित पहुंच कई बार चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे में Virtual Lab विद्यार्थियों के लिए तकनीक आधारित प्रयोगात्मक शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
इसके माध्यम से विद्यार्थी डिजिटल प्रयोगशाला की कार्यप्रणाली, वैज्ञानिक प्रयोगों की प्रक्रिया और आधुनिक प्रयोगात्मक दृष्टिकोण को समझ पा रहे हैं। इससे पारंपरिक कक्षा शिक्षण के साथ तकनीक आधारित शिक्षा का बेहतर समन्वय भी संभव हो रहा है।
ग्रीन केमिस्ट्री और हाइड्रोजन उत्पादन पर शोध
डॉ. शर्मा के शोध क्षेत्र आधुनिक रसायन विज्ञान की कई महत्वपूर्ण दिशाओं से जुड़े हैं। उनके प्रमुख शोध हितों में पर्यावरण-अनुकूल उत्प्रेरकों का विकास, ग्रीन एवं बाइमेटैलिक नैनोपार्टिकल्स, हाइड्रोजन उत्पादन के लिए इलेक्ट्रोकैटेलिसिस, पुनः उपयोग योग्य धातु उत्प्रेरक तथा औषधीय महत्व के यौगिकों के निर्माण के लिए नवीन सिंथेटिक विधियां शामिल हैं।
वर्तमान दौर में स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ तकनीकों को लेकर दुनिया भर में शोध हो रहा है। ऐसे में ग्रीन केमिस्ट्री, कैटेलिसिस और हाइड्रोजन उत्पादन जैसे क्षेत्र विशेष महत्व रखते हैं।
डॉ. शर्मा का शोध इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि आधुनिक रसायन विज्ञान में अब केवल नए यौगिकों का निर्माण ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि ऐसी प्रक्रियाओं का विकास भी आवश्यक है जो अधिक प्रभावी, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल हों।
Young Scientist Award–2025 से पहले भी मिली थी पहचान
डॉ. निधि शर्मा की शोध उपलब्धियों को इससे पहले भी महत्वपूर्ण पहचान मिल चुकी है। वर्ष 2025 में आयोजित 20वीं उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कांग्रेस (USSTC-2025) में उन्हें Young Scientist Award–2025 से सम्मानित किया गया था।
अब Education Excellence Award–2026 मिलने से उनकी उपलब्धियों की श्रृंखला में एक और महत्वपूर्ण सम्मान जुड़ गया है। जहां Young Scientist Award उनके शोध एवं वैज्ञानिक योगदान को रेखांकित करता है, वहीं Education Excellence Award शिक्षा, शोध, नवाचार और अकादमिक योगदान के व्यापक पक्ष को सामने लाता है।
विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनी अकादमिक यात्रा
डॉ. शर्मा की अकादमिक यात्रा विद्यार्थियों और युवा शोधार्थियों के लिए प्रेरणादायी है। प्रतियोगी परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर सफलता से लेकर IIT मद्रास से पीएच.डी., उत्कृष्ट शोध के लिए सम्मान, इजराइल में पोस्ट-डॉक्टोरल शोध, IIT रुड़की में नेशनल पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप और अब पर्वतीय क्षेत्र में अध्यापन एवं शोध तक का उनका सफर निरंतर मेहनत और अकादमिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उनकी उपलब्धियों में CSIR-NET JRF में अखिल भारतीय 60वीं रैंक, IIT मद्रास से पीएच.डी., Prof. G. Sundararajan Endowment Prize, Kreitman Post-Doctoral Research Fellowship, SERB-National Post-Doctoral Fellowship, Young Scientist Award–2025 और Education Excellence Award–2026 प्रमुख हैं।
प्राचार्य ने बताया महाविद्यालय के लिए गौरव
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडेय ने डॉ. निधि शर्मा की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी।
उन्होंने कहा कि डॉ. निधि शर्मा की उपलब्धि पूरे महाविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। उच्चस्तरीय शोध, अध्यापन और नवाचार के प्रति उनका समर्पण विद्यार्थियों एवं युवा शोधार्थियों के लिए प्रेरणादायी है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से प्राप्त शोध अनुभव का लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसी उपलब्धियां महाविद्यालय में शोध एवं नवाचार की संस्कृति को और मजबूत करती हैं।
महाविद्यालय के प्राध्यापकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भी डॉ. शर्मा को सम्मान मिलने पर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
पुरस्कार से आगे उपलब्धि का बड़ा संदेश
डॉ. निधि शर्मा को मिला Education Excellence Award–2026 केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में उच्च शिक्षा और शोध की संभावनाओं का भी प्रतीक है। बड़े शोध संस्थानों में अर्जित ज्ञान और अनुभव को यदि पर्वतीय क्षेत्र के विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाए तो उन्हें भी विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं।
IIT मद्रास की शोध प्रयोगशाला से इजराइल के अंतरराष्ट्रीय शोध वातावरण, IIT रुड़की की पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च और फिर रानीखेत के विद्यार्थियों के बीच विज्ञान शिक्षण तक पहुंची डॉ. निधि शर्मा की यात्रा शोध, शिक्षा और नवाचार के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में सामने आती है।





