अंकिता हत्याकांड: उत्तराखंड से दिल्ली और सिक्किम तक विरोध, कथित VIP की जांच की मांग तेज
देहरादून/दिल्ली। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक हलचल तेज हो गई है।
अंकिता के माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने और मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने के लिए लगातार आवाज उठा रहे हैं। दिल्ली के इंडिया गेट से लेकर देहरादून के लोकभवन तक विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है।
इस बीच देहरादून में लोकभवन के बाहर प्रदर्शन करने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत कांग्रेस के 30 नामजद नेताओं और 10 से 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। वहीं, दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने को लेकर भी कांग्रेस और छात्र संगठनों का विरोध सामने आ रहा है।
लोकभवन के बाहर प्रदर्शन, पुलिस की शिकायत पर मुकदमा
जानकारी के अनुसार, 15 अक्टूबर को देहरादून में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने तथा हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका की जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, विधायक प्रीतम सिंह, पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लोकभवन की ओर कूच किया। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर लोकभवन के मुख्य गेट तक पहुंचने और उसे खोलने की कोशिश की। इस दौरान धक्का-मुक्की होने और सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस की शिकायत के आधार पर देहरादून के कैंट थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132 और 223 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी है।
FIR में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम
इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, विधायक प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत कई प्रमुख नेताओं के नाम शामिल बताए गए हैं। इनके अलावा गरिमा मेहरा दसौनी, ज्योति रौतेला, पूर्व विधायक राजकुमार और लालचंद शर्मा सहित अन्य कांग्रेस नेताओं को भी नामजद किया गया है।
पुलिस ने 10 से 15 अज्ञात प्रदर्शनकारियों को भी आरोपी बनाया है। मामले के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। कांग्रेस जहां अंकिता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने के संकेत दे रही है, वहीं लोकभवन के बाहर हुए प्रदर्शन को लेकर दर्ज मुकदमे ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता का धरना
दूसरी ओर, अंकिता भंडारी के माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर दिल्ली में भी आवाज उठा रहे हैं। वे इंडिया गेट पर धरना देकर हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की और उनकी बात सुनी। परिवार की प्रमुख मांग है कि मामले में सामने आए कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। इसके साथ ही परिवार की ओर से यह मांग भी उठाई जा रही है कि जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर रोक लगाने के विषय पर विचार किया जाए।
गुरुवार तड़के दिल्ली पुलिस अंकिता के माता-पिता को इंडिया गेट से हिरासत में लेकर गई थी। हालांकि, करीब दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद भी परिवार की ओर से न्याय की मांग जारी है।
आज फिर बाइक रैली निकालेगी कांग्रेस
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस ने शनिवार को देहरादून में एक बार फिर विरोध-प्रदर्शन का कार्यक्रम बनाया है। पार्टी की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में सुबह 11 बजे शिमला बाईपास चौक से बाइक रैली शुरू होनी प्रस्तावित है। रैली के बाद घंटाघर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
कांग्रेस इस आंदोलन के जरिए हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका की जांच, मामले में पारदर्शिता और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को प्रमुखता से उठाएगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक परिवार को न्याय मिलने और मामले की निष्पक्ष जांच से जुड़ी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आवाज उठाई जाती रहेगी।
सिक्किम में भी राज्यपाल नियुक्ति को लेकर विरोध
अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़ा राजनीतिक विवाद अब उत्तराखंड से बाहर भी चर्चा में है। दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने को लेकर सिक्किम विश्वविद्यालय के छात्र संगठनों ने भी विरोध जताया है। इस नियुक्ति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उत्तराखंड में कांग्रेस और अन्य संगठनों की ओर से भी विरोध जारी है।
न्याय की मांग के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव
अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे का रूप लेती जा रही है। एक ओर अंकिता के माता-पिता निष्पक्ष जांच और कथित वीआईपी की भूमिका स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस लगातार प्रदर्शन कर सरकार और संबंधित एजेंसियों पर सवाल उठा रही है।
लोकभवन के बाहर हुए प्रदर्शन के मामले में कांग्रेस नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज होने और दिल्ली में अंकिता के माता-पिता के आंदोलन के बीच उत्तराखंड की राजनीति में टकराव और तेज होने के संकेत हैं। अब सबकी नजर कांग्रेस के प्रस्तावित प्रदर्शन, पुलिस की आगे की कार्रवाई और अंकिता के परिवार की मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।


