हल्द्वानी : मां जिया मंदिर से कथित अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर पहाड़ी आर्मी का हस्ताक्षर अभियान 14वें दिन भी जारी

हल्द्वानी में आवास विकास के अजंता चौराहे पर चला अभियान, पहाड़ी आर्मी ने मंदिर की मूल पहचान बहाल करने की उठाई मांग; संगठन ने आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी

हल्द्वानी। कुमाऊं की ऐतिहासिक लोक-वीरांगना और राजमाता मां जिया के मंदिर की भूमि से कथित अतिक्रमण हटाने तथा मंदिर की मूल पहचान बहाल करने की मांग को लेकर पहाड़ी आर्मी संगठन का हस्ताक्षर अभियान लगातार जारी है। बुधवार को अभियान के 14वें दिन आवास विकास स्थित अजंता चौराहे पर महिला नगर अध्यक्ष कविता जीना के नेतृत्व में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने स्थानीय लोगों से संपर्क कर इस मुद्दे पर समर्थन मांगा।

पहाड़ी आर्मी की महिला नगर अध्यक्ष कविता जीना ने कहा कि मां जिया को कुमाऊं की लक्ष्मीबाई के रूप में भी जाना जाता है। कुमाऊं के लोग उन्हें राजमाता जिया के रूप में सम्मान देते हैं और कुलदेवी के तौर पर उनकी पूजा करते हैं। हल्द्वानी के रानीबाग स्थित चित्रेश्वर धाम में मां जिया का पौराणिक मंदिर होने की मान्यता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर की मूल पहचान को बदलकर वहां नवग्रह शनि मंदिर के नाम से निर्माण किया गया है। संगठन का कहना है कि इससे पहाड़ी समाज की धार्मिक आस्था और भावनाओं को ठेस पहुंची है।

कविता जीना ने आरोप लगाया कि जिस स्थान को संगठन मां जिया की भूमि और उनके मंदिर से जुड़ा हुआ मानता है, वहां अतिक्रमण कर विशाल शनि मंदिर का निर्माण किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर परिसर में शौचालय बनाए जाने और मूल मंदिर के स्वरूप को प्रभावित किए जाने से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। संगठन ने इस मामले में संबंधित पक्ष के खिलाफ कार्रवाई करने और मंदिर की पुरानी पहचान बहाल करने की मांग की।

पहाड़ी आर्मी की महिला जिला अध्यक्ष प्रेमा मेर ने आरोप लगाया कि मां जिया के मंदिर से जुड़े स्थान पर कब्जा किए जाने के विरोध में जब संगठन के लोग दर्शन करने पहुंचे, तो उनके साथ कथित तौर पर जानलेवा हमला किया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में संगठन से जुड़े 49 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अपनी धार्मिक आस्था और मंदिर से जुड़े अधिकारों की बात उठाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सभी पक्षों को सुनकर उचित कार्रवाई करने की मांग की।

दो साल पहले आदेश जारी होने का दावा

पहाड़ी आर्मी के जिलाध्यक्ष एवं पूर्व सैनिक राजेंद्र कांडपाल ने कहा कि संगठन के पास इस मामले से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने दावा किया कि करीब दो वर्ष पहले ही शनि मंदिर को हटाने के संबंध में आदेश जारी हो चुका था, इसके बावजूद निर्माण जारी रहने और मामले का समाधान नहीं होने पर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि यदि ऐसा कोई आदेश जारी हुआ था, तो उसका अनुपालन क्यों नहीं हुआ। उन्होंने मामले में कथित रूप से संरक्षण देने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की। कांडपाल ने चेतावनी दी कि यदि संगठन की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

चौक-चौराहों पर हस्ताक्षर अभियान, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

पहाड़ी आर्मी के पदाधिकारियों ने बताया कि संगठन हल्द्वानी के विभिन्न चौक-चौराहों पर हस्ताक्षर अभियान चलाकर लोगों को इस मुद्दे से जोड़ रहा है। संगठन का उद्देश्य मां जिया मंदिर की कथित अतिक्रमण संबंधी समस्या को प्रशासन के सामने मजबूती से उठाना और पहाड़ी समाज के अधिक से अधिक लोगों का समर्थन जुटाना है।

संगठन ने कहा कि वह मंदिर की मूल पहचान बहाल करने और विवाद का समाधान कराने की मांग को लेकर पीछे नहीं हटेगा। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। हालांकि, संगठन की ओर से लगाए गए अतिक्रमण, हमले और आदेश की अवहेलना संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्ष और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

ये रहे मौजूद

हस्ताक्षर अभियान के दौरान जिला मीडिया प्रभारी हिमांशु शर्मा, नगर अध्यक्ष आनंद कन्याल, देवेंद्र स्यालाकोटी, राजा रामलाल, मोहिनी देवी, मनोज रावत, प्रदीप रौतेला, अंजू पांडे, नीमा भट्ट, रमा पांडे, गीता बिष्ट, हरेंद्र राणा सहित पहाड़ी आर्मी के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

पहाड़ी आर्मी ने स्पष्ट किया कि मां जिया मंदिर से जुड़े इस मामले को लेकर हस्ताक्षर अभियान आगे भी जारी रहेगा और संगठन जनसमर्थन के माध्यम से अपनी मांगों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाएगा।

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