लचर स्वास्थ्य सेवाओं के हाल : चंपावत में विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी पर सवाल, गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद हायर सेंटर रेफर हुई 22 वर्षीय गर्भवती,पति ने लगाए उपचार में देरी के आरोप

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गर्भ में हुई शिशु की मौत, अस्पताल ने विशेषज्ञ न होने का हवाला देकर महिला को किया रेफर

चंपावत। ‘आदर्श चंपावत’ की परिकल्पना के बीच जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 22 वर्षीय गर्भवती प्रियंका सामंत के गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद जिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है।

महिला को बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया। इस मामले में महिला के पति जीवन सिंह ने उपचार में देरी और स्वास्थ्य व्यवस्था में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

स्वजन का आरोप है कि यदि समय रहते गर्भस्थ शिशु की स्थिति की सही जानकारी मिल जाती और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाता, तो शायद उनके बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने बताया है कि पूर्व की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु को स्वस्थ बताया गया था और दोनों जांचों के बीच पर्याप्त अंतर है।

14 अगस्त को अल्ट्रासाउंड में बताया गया था शिशु स्वस्थ

स्वजनों के अनुसार, प्रियंका सामंत 14 अगस्त को लोहाघाट उप जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने पहुंची थीं। जांच के बाद चिकित्सकों की ओर से उन्हें बताया गया कि गर्भस्थ शिशु स्वस्थ है। परिवार ने इसी रिपोर्ट के आधार पर स्थिति सामान्य मानते हुए राहत की सांस ली।

इसके चार दिन बाद 18 अगस्त को प्रियंका के पेट में अचानक तेज दर्द शुरू हो गया। इसी दौरान सड़क बंद होने के कारण पति जीवन सिंह को उन्हें करीब तीन किलोमीटर तक पैदल लेकर आना पड़ा। इसके बाद किसी तरह वाहन की व्यवस्था कर महिला को लोहाघाट उप जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

निजी अस्पताल में जांच के बाद सामने आई गंभीर स्थिति

लोहाघाट उप जिला अस्पताल से प्रियंका को चंपावत जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। जिला अस्पताल पहुंचने से पहले स्वजनों ने चंपावत के एक निजी अस्पताल में महिला का अल्ट्रासाउंड कराया। पति जीवन सिंह के अनुसार, निजी अस्पताल में जांच के दौरान चिकित्सकों ने बताया कि गर्भस्थ शिशु की करीब दो सप्ताह पहले ही मौत हो चुकी है।

यह जानकारी मिलने के बाद परिवार में हड़कंप मच गया। इसके बाद प्रियंका को जिला अस्पताल ले जाया गया। यहां स्वजनों को बताया गया कि अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं है और महिला को बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर किया जाना आवश्यक है।

पति ने लगाए उपचार में देरी के आरोप

प्रियंका के पति जीवन सिंह ने आरोप लगाया कि यदि समय पर सही जानकारी और आवश्यक उपचार मिल जाता तो उनका बच्चा आज जीवित होता। उनका कहना है कि जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण गंभीर स्थिति वाले मरीजों को भी हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा है।

उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। घटना के बाद जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं और विशेष रूप से महिला रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

पीएमएस ने कहा—पूर्व की रिपोर्ट में शिशु था स्वस्थ

जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. एचएस ह्यांकी ने बताया कि करीब सात दिन पहले कराई गई अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु को स्वस्थ बताया गया था। उन्होंने कहा कि दोनों अल्ट्रासाउंड के बीच पर्याप्त अंतर है। जिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण महिला को बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया।

अस्पताल प्रबंधन के इस बयान के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि दोनों अल्ट्रासाउंड रिपोर्टों में सामने आए अंतर की वास्तविक वजह क्या थी और गर्भस्थ शिशु की स्थिति में बदलाव कब और किन परिस्थितियों में हुआ।

इंटरनेट मीडिया पर वीडियो जारी कर बताई पीड़ा

मामले के बाद प्रियंका के पति जीवन सिंह ने इंटरनेट मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर अपनी व्यथा बताई। उन्होंने जिला अस्पताल का वीडियो साझा करते हुए आम लोगों से अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए और जिला अस्पताल न जाने की अपील तक कर दी।

एक अन्य वीडियो में जीवन सिंह अपनी पत्नी का रेफरल पेपर बनवाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसमें स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण महिला को रेफर किए जाने की बात दर्ज होने का दावा किया गया है।

फिलहाल इस पूरे मामले ने चंपावत जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, गर्भवती महिलाओं के उपचार और रेफरल व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब परिवार की ओर से मामले की जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग की जा रही है।

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