रानीखेत में 24–25 मार्च को राष्ट्रीय संगोष्ठी: विज्ञान आधारित स्टार्टअप और उद्यमिता पर होगा मंथन

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रानीखेत। स्वर्गीय  जैयदत्त वैल्ला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत (अल्मोड़ा) में 24 एवं 25 मार्च 2026 को “सस्टेनेबल इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया जाएगा।

कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के वाणिज्य विभाग द्वारा किया जा रहा है तथा इसे उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकोस्ट) का प्रायोजन प्राप्त है।

संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य विज्ञान आधारित नवाचार, स्टार्टअप्स और उद्यमिता को बढ़ावा देना तथा सतत विकास की दिशा में सार्थक चर्चा करना है।

इस आयोजन में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों, नीति-निर्माताओं और विद्यार्थियों को एक साझा मंच मिलेगा।

कार्यक्रम में सतत प्रौद्योगिकी, जैव-नवाचार, कृषि एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में वैज्ञानिक समाधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के माध्यम से डिजिटल तकनीकों का उपयोग, स्टार्टअप नीतियाँ, निवेश मॉडल तथा अकादमिक-औद्योगिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

देशभर के शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को शोध-पत्र प्रस्तुत करने हेतु आमंत्रित किया गया है।

सारांश प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 20 मार्च 2026 तथा पूर्ण शोध-पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 23 मार्च 2026 निर्धारित की गई है।

प्रतिभागी ऑनलाइन पंजीकरण कर डिजिटल माध्यम से शुल्क जमा कर सकते हैं।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडे ने कहा कि यह संगोष्ठी विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं में नवाचार व उद्यमिता की सोच को मजबूत करेगी तथा विज्ञान आधारित समाधानों को प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजन ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं को राष्ट्रीय नवाचार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

संगोष्ठी के संयोजक एवं वाणिज्य विभागाध्यक्ष प्रो. पी.एन. तिवारी ने कहा कि यह आयोजन प्रतिभागियों को शोध और उद्यमिता के समन्वय का बेहतरीन अवसर देगा। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप नीतियाँ, निवेश मॉडल और शोध के व्यावसायीकरण जैसे विषय युवा नवाचारकर्ताओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे।

यह राष्ट्रीय संगोष्ठी महाविद्यालय परिसर में आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर से शिक्षण संस्थानों, उद्योग विशेषज्ञों एवं शोधार्थियों की सहभागिता अपेक्षित है।

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