बेरीनाग पालिका में भ्रष्टाचार जांच पर उठे सवाल, ‘माली’ को बनाया जांच अधिकारी; DM से मजिस्ट्रेटी जांच की मांग

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हेलो हेल्प पोर्टल पर शिकायत के एक माह बाद भी कार्रवाई नहीं, शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में PIL दायर करने की दी चेतावनी

बेरीनाग (पिथौरागढ़)। नगर पालिका परिषद बेरीनाग में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) और स्वच्छ भारत मिशन के तहत कथित भ्रष्टाचार एवं वित्तीय अनियमितताओं का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। वार्ड संख्या-3 भट्टीगांव निवासी कैलाश चन्याल द्वारा 15 मई 2026 को ‘हेलो हेल्प’ पोर्टल पर दर्ज कराई गई शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय नगर पालिका प्रशासन ने 18 मई 2026 को अपने ही अधीनस्थ कर्मचारियों की एक जांच समिति गठित कर दी। समिति में एक माली (बहुउद्देशीय कर्मचारी) तथा कनिष्ठ सहायकों को शामिल कर करोड़ों रुपये की योजनाओं में हुई कथित अनियमितताओं की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। इसे शिकायतकर्ता ने प्रशासनिक व्यवस्था का मजाक बताते हुए निष्पक्ष जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

कैलाश चन्याल का कहना है कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल में कथित अनियमितताएं हुई हैं, उनके अधीनस्थ कर्मचारियों से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा नहीं की जा सकती। उन्होंने इसे स्पष्ट रूप से हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) का मामला बताया है।

शिकायतकर्ता ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने में भी बाधाएं उत्पन्न किए जाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दस्तावेजों के निरीक्षण के लिए अत्यधिक शुल्क मांगा गया तथा निरीक्षण के दौरान मोबाइल फोन से फोटो लेने पर रोक लगा दी गई, जिससे दस्तावेजों में संभावित हेरफेर की आशंका पैदा हो गई है।

एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से ‘हेलो हेल्प’ पोर्टल की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी पिथौरागढ़ से मांग की है कि नगर पालिका द्वारा गठित जांच समिति को तत्काल भंग कर पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र अधिकारी, जैसे उप जिलाधिकारी (एसडीएम) अथवा मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की अध्यक्षता में कराई जाए।

उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आगामी सात दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो वह मामले को लेकर उच्च न्यायालय नैनीताल में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

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