रानीखेत में 2027 के टिकट को लेकर भाजपा में दावेदारी तेज, धन सिंह रावत बोले- “इस बार मेरी दावेदारी 100 प्रतिशत”
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष व पूर्व ब्लॉक प्रमुख ने विधायक प्रमोद नैनवाल पर विकास कार्यों को लेकर उठाए सवाल, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल को बताया प्रमुख मुद्दा
रिपोर्ट– बलवन्त सिंह रावत
रानीखेत। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। रानीखेत विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के भीतर टिकट को लेकर दावेदारियां सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, पूर्व ब्लॉक प्रमुख और पूर्व जिला पंचायत सदस्य धन सिंह रावत ने भाजपा से अपनी दावेदारी को मजबूती से सामने रखा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में भी उनकी दावेदारी मजबूत थी, लेकिन जातिगत समीकरणों के चलते पैनल में प्रथम स्थान पर होने के बावजूद उन्हें टिकट नहीं मिल सका। इस बार उन्होंने अपनी दावेदारी को 100 प्रतिशत बताते हुए पार्टी हाईकमान से रानीखेत की परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेने की उम्मीद जताई है।
धन सिंह रावत ने कहा कि भाजपा में रानीखेत विधानसभा क्षेत्र से इस समय कई दावेदार हैं और उनके अनुसार इसके पीछे वर्तमान विधायक के कामकाज को लेकर कार्यकर्ताओं में असंतोष भी एक कारण है। हालांकि उन्होंने सभी दावेदारों को अपना भाई बताते हुए कहा कि पार्टी जिसे भी टिकट देगी, सभी कार्यकर्ता उसके साथ एकजुट होकर 2027 के चुनाव में पार्टी को मजबूत करने का काम करेंगे।
स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था पर उठाए सवाल
धन सिंह रावत ने रानीखेत विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था को प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि रानीखेत का अस्पताल 100 बेड का होने के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। ताड़ीखेत, नौघर, डिंगा, चमड़खान, विनायक, बासोट और भतरौजखान सहित ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में चिकित्सकों और सुविधाओं की कमी का मुद्दा उन्होंने उठाया।
उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं तत्कालीन सांसद अजय भट्ट के कार्यकाल में क्षेत्र में कई अस्पताल भवनों का निर्माण हुआ, लेकिन यदि इन भवनों में पर्याप्त चिकित्सक और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी तो इनका उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
पेयजल के मुद्दे पर उन्होंने बयेडी़ पंपिंग योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा योजना के लिए 17 करोड़ रुपये दिए जाने के बावजूद उनके अनुसार अभी तक धरातल पर अपेक्षित काम नहीं हो पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना को लेकर हुए आंदोलन को उन्होंने सरकार के खिलाफ गलत संदेश न जाए, इस उद्देश्य से समाप्त कराया था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ठेकेदार के खिलाफ समय पर कार्रवाई कर नया ठेकेदार नियुक्त किया जाता तो धूरापाट क्षेत्र के करीब 35 गांवों तक पेयजल पहुंच सकता था।
सड़कों की बदहाली को लेकर विधायक से सवाल
धन सिंह रावत ने रानीखेत विधानसभा क्षेत्र की सड़कों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खैरना पुल से रानीखेत विधानसभा क्षेत्र की ओर आने वाली सड़क का एक हिस्सा बेहद खराब स्थिति में है और कई स्थानों पर सड़क की चौड़ाई भी प्रभावित हुई है। उनके अनुसार इस मार्ग के लिए करीब 44 करोड़ रुपये का एस्टीमेट लंबित है।
उन्होंने कहा कि रानीखेत से गैरसैंण की ओर जाने वाले यातायात के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण है। सड़क की स्थिति को लेकर वह मुख्यमंत्री से मुलाकात कर बजट उपलब्ध कराने की मांग करेंगे।
उन्होंने घट्टी-बासोट मार्ग का भी उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व में इस महत्वपूर्ण सड़क के लिए केंद्र स्तर से करीब 10 करोड़ रुपये के एस्टीमेट की पहल की गई थी, लेकिन इसके बाद क्षेत्र की इस सड़क को लेकर अपेक्षित पहल नहीं हुई।
धूरापाट के रिची-बिल्लेख मोटर मार्ग की खराब स्थिति का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि इस सड़क को मुख्यमंत्री घोषणा में शामिल किए जाने के बावजूद अभी तक इसके लिए बजट उपलब्ध नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र की खराब सड़कों के लिए वह मुख्यमंत्री से बजट उपलब्ध कराने का आग्रह करेंगे।
ग्रामीण सड़कों के लिए बजट की जरूरत बताई
रावत ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की कई सड़कें लंबे समय से मरम्मत और डामरीकरण की प्रतीक्षा कर रही हैं। उन्होंने एरोड़-खनियां मोटर मार्ग का उदाहरण देते हुए कहा कि करीब 12 वर्ष पहले बहुगुणा सरकार के समय इस सड़क पर डामरीकरण हुआ था, लेकिन उसके बाद से सड़क की स्थिति खराब होती चली गई।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से सड़क निर्माण और मरम्मत के लिए बजट उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन इसके लिए स्थानीय स्तर से प्रभावी पहल और प्रस्ताव भेजे जाने की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि रानीखेत क्षेत्र की कई ग्रामीण सड़कों के लिए विधायक स्तर से अपेक्षित पहल नहीं हुई है।
धनबल की राजनीति पर भी साधा निशाना
धन सिंह रावत ने कहा कि रानीखेत विधानसभा में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार से जुड़े कई मुद्दे हैं, जिन पर गंभीरता से काम किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में विकास कार्यों को गति देने की बात कही जा रही है, लेकिन विधानसभा स्तर पर भी जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने धनबल के आधार पर राजनीति में आगे आने वाले लोगों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में लंबे समय से जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि टिकट का अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व करेगा और पार्टी जिस प्रत्याशी को मैदान में उतारेगी, सभी कार्यकर्ता उसके समर्थन में एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे।
अब टिकट के फैसले पर टिकी नजर
धन सिंह रावत की ओर से खुलकर अपनी दावेदारी सामने रखे जाने के बाद रानीखेत विधानसभा में भाजपा की आंतरिक राजनीति और संभावित टिकट को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक ओर मौजूदा विधायक प्रमोद नैनवाल के सामने पार्टी के भीतर अपनी स्थिति बनाए रखने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर धन सिंह रावत सहित अन्य दावेदार भी अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं।
हालांकि भाजपा की ओर से 2027 विधानसभा चुनाव के लिए रानीखेत सीट पर प्रत्याशी को लेकर अभी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में अंतिम तस्वीर पार्टी नेतृत्व के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल रानीखेत की राजनीति में सबसे अधिक चर्चा इसी बात को लेकर है कि आगामी चुनाव में भाजपा पुराने चेहरे पर भरोसा जताती है या संगठन के किसी नए दावेदार को मौका देती है।





