स्व. जयदत्त वैला राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रानीखेत में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत छात्र-छात्राओं को जनभागीदारी की दी गई जानकारी।
रिपोर्ट– बलवन्त सिंह रावत
रानीखेत। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत सोमवार को स्व. जयदत्त वैला राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत में टीबी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। “टीबी रोग में जनभागीदारी” विषय पर आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को क्षय रोग के प्रति जागरूक करते हुए इसके लक्षण, बचाव, जांच और उपचार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
कार्यक्रम में एनटीईपी के नोडल ऑफिसर डॉ. दीपक शर्मा तथा टी.यू. ताड़ीखेत के वरिष्ठ चिकित्सा पर्यवेक्षक गोविन्द बिष्ट ने छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि टीबी एक गंभीर संक्रामक बीमारी जरूर है, लेकिन समय पर जांच और नियमित उपचार के माध्यम से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
वक्ताओं ने छात्र-छात्राओं को टीबी के प्रमुख लक्षणों की जानकारी देते हुए बताया कि लंबे समय तक खांसी रहने या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। ऐसे लोगों को समय रहते जांच कराने और चिकित्सकीय परामर्श लेने के लिए प्रेरित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि टीबी की जांच और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं तथा बीमारी को लेकर डर या सामाजिक भेदभाव के बजाय जागरूकता और सही जानकारी की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि टीबी के पूर्ण उन्मूलन के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। खासतौर पर युवाओं की भूमिका इस अभियान में महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि वे सही जानकारी को तेजी से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचा सकते हैं।
इस अवसर पर छात्र-छात्राओं को ‘टीबी मुक्त भारत ऐप’ के उपयोग की भी जानकारी दी गई। युवाओं से अपील की गई कि वे ऐप के माध्यम से वॉलेंटियर के रूप में पंजीकरण कर टीबी मुक्त भारत अभियान में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।
वक्ताओं ने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे टीबी से संबंधित सही और वैज्ञानिक जानकारी अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों तक पहुंचाएं। साथ ही यदि किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे समय पर जांच और इलाज के लिए प्रेरित करें।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जनभागीदारी, समय पर जांच, नियमित उपचार और जागरूकता के माध्यम से ही टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सकता है।





