ग्रामीण विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की पहल, OFETs पर ऑनलाइन कार्यशाला कल
“विज्ञान मानवता के लिए एक सुंदर उपहार है; हमें इसे विकृत नहीं करना चाहिए।” — Albert Einstein
POSTECH दक्षिण कोरिया के रिसर्च प्रोफेसर डॉ. सैयद जाहिद हसन देंगे व्याख्यान, प्रतिभागियों को मिलेगा ई-प्रमाणपत्र
रानीखेत। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत के विज्ञान लोकप्रियीकरण प्रकोष्ठ (Science Popularisation Cell) एवं MetaChem Academy LLP के संयुक्त तत्वावधान में 20 जून 2026 को “Organic Field-Effect Transistors (OFETs): Fundamentals, Fabrication and Device Characterization” विषय पर एक विशेष ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला का उद्देश्य ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और वैश्विक शोध गतिविधियों से जोड़ना है।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को ऑर्गेनिक फील्ड-इफेक्ट ट्रांजिस्टर (OFETs) की मूलभूत अवधारणाओं, कार्यप्रणाली, निर्माण प्रक्रिया और डिवाइस कैरेक्टराइजेशन की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही ऑर्गेनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी और इनके आधुनिक अनुप्रयोगों पर भी चर्चा होगी, जिससे विद्यार्थियों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नवीनतम क्षेत्रों को समझने का अवसर मिलेगा।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता दक्षिण कोरिया के POSTECH में रिसर्च प्रोफेसर डॉ. सैयद जाहिद हसन होंगे। उनके अंतरराष्ट्रीय शोध अनुभव से प्रतिभागियों को वैश्विक स्तर पर हो रहे वैज्ञानिक अनुसंधानों और नवाचारों की जानकारी प्राप्त होगी।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पाण्डे ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। इनके माध्यम से विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से सीधे सीखने का अवसर मिलता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कार्यशाला का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।
विज्ञान लोकप्रियीकरण प्रकोष्ठ के समन्वयक डॉ. भारत पाण्डेय ने बताया कि प्रकोष्ठ का उद्देश्य पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक आधुनिक विज्ञान, नवीन शोध और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन पहुंचाना है। इसी क्रम में समय-समय पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के व्याख्यान, कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और शोध के प्रति रुचि विकसित हो सके।
उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला बीएससी, एमएससी, पीएचडी शोधार्थियों, शिक्षकों और युवा शोधकर्ताओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी। प्रतिभागियों को ई-प्रमाणपत्र के साथ एक वर्ष तक कार्यशाला की रिकॉर्डिंग देखने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
यह पहल ग्रामीण प्रतिभाओं को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अवसरों से परिचित कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

