उत्तराखंड में चल रहा था बड़ा खेल, बांग्लादेशियों-रोहिंग्याओं को मदद कर रही थी बंद संस्था, डेमोग्राफिक चेंज की बड़ी साजिश

Share the News

हल्द्वानी। मुख्यमंत्री  धामी के आदेश पर प्रदेश में जारी किए गए स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की जांच जारी है और इसी जांच के दौरान कुमाऊं के सबसे बड़े शहर में एक ऐसी संस्था का खुलासा हुआ है, जो कई साल पहले बंद हो चुकी है।

लेकिन इसका लेटर पैड दूसरे राज्यों के लोगों को देवभूमि का स्थाई निवासी बता रहा है. संस्था को लेकर जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है और इसकी फर्जीवाड़ा सामने आया है।

हल्द्वानी के सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल सिंह चौहान और एसडीएम राहुल साह की टीम ने जिस रईस अहमद अंसारी से पूछताछ की, वो कोई सामान्य आदमी नहीं था. वह एक बड़ा जालसाज है, जो वैसे तो भरे बाजार में दुकानदारी करता है।

लेकिन पर्दे के पीछे अंजुमन मोमिन अंसार नाम की संस्था के इस लेटर हेड के जरिए देवभूमि की डेमोग्राफी बदलने की गहरी साजिशें रचता है. जबकि इसकी ये बनभूलपुरा इलाके से चलने वाली ये संस्था कई साल पहले बंद हो चुकी है।

साथ ही इसके अध्यक्ष और महासचिव की भी वर्षों पहले मौत हो चुकी है. लेकिन रईस अहमद अंसारी इसी बंद संस्था के लेटरहेड पर बांग्लादेशियों, रोहिंग्याओं और बाहरी राज्यों से आए संदिग्ध लोगों को उत्तराखंड का मूल निवासी होने का प्रमाणपत्र जारी कर देता था।

हैरानी की बात ये है कि इसके लेटर हेड को सरकारी कर्मचारी भी सर्टिफिकेट बनाने का आधार बना लेते थे. जाहिर है मामला बेहद गंभीर है. क्योंकि साजिश गहरी है।

यही नहीं नैनीताल जिले की दूसरी तहसीलों में भी जांच के दौरान रोजाना नए-नए खुलासे हो रहे हैं।

यही नहीं सीएससी सेंटर भी गड़बड़ी के बड़े अड्डे साबित हो रहे हैं. इसलिए हर चीज की बारीकी से जांच जारी है. साफ है जैसे-जैसे जांच के कदम बढ़ रहे हैं।

डेमोग्राफी बदलने की साजिश के भी नए-नए तौर तरीके सामने आ रहे हैं. लेकिन जांच में जुटी एजेंसियों के लिए इस साजिश की तह तक पहुंचना कहीं से भी आसान नहीं. क्योंकि इसमें एक पूरा तंत्र शामिल है।

See also  नैनीताल : विकास कार्यों में धन खर्च करने पर रामनगर व भीमताल विधायक फिस्सडी! महज इतना खर्च कर पाए खर्च.....
error: Content is protected !!