ग्रामीण विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता से सशक्त हुई भारत बौद्धिक परीक्षा–2026
रानीखेत में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न
रानीखेत (अल्मोड़ा)। स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित भारत बौद्धिक परीक्षा–2026 शुक्रवार, 31 जनवरी 2026 को शांतिपूर्ण, अनुशासित एवं सुव्यवस्थित वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यह महाविद्यालय परीक्षा का नोडल केंद्र रहा, जहां रानीखेत सहित आसपास के ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों से आए विद्यार्थियों ने उत्साह और आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में भाग लिया।
कड़ाके की ठंड के बावजूद विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि ग्रामीण अंचलों में शिक्षा के प्रति जागरूकता और बौद्धिक विकास की प्रतिबद्धता निरंतर मजबूत हो रही है। परीक्षा संचालन के दौरान सभी शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाएं निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुनिश्चित की गईं। परीक्षा केंद्र पर मोबाइल फोन, कैलकुलेटर और अन्य प्रतिबंधित सामग्रियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहा, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रही।
परीक्षा के नोडल अधिकारी डॉ. भारत पांडेय ने कहा कि भारत बौद्धिक परीक्षा रटंत ज्ञान के बजाय समझ, तर्कशक्ति और विचारशील दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों की सहभागिता यह सिद्ध करती है कि बौद्धिक क्षमता किसी भौगोलिक सीमा से बंधी नहीं होती।
इस अवसर पर डॉ. सी. एस. पंत ने कहा कि इस प्रकार की परीक्षाएं विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक सोच, समस्या-समाधान क्षमता और आत्मविश्वास विकसित करती हैं, जो उनके शैक्षणिक भविष्य के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडेय ने परीक्षा के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों में अपार संभावनाएं हैं और भारत बौद्धिक परीक्षा जैसे आयोजन उन्हें बौद्धिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
परीक्षा के सफल समापन के बाद सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, जिससे विद्यार्थियों में उत्साह और उपलब्धि का भाव देखने को मिला।
परीक्षा संचालन में डॉ. सी. एस. पंत, डॉ. कोमल गुप्ता, श्री बिनोद तिवारी एवं श्री शंकर क्वरबी का विशेष सहयोग रहा। उनके समन्वित प्रयासों से परीक्षा केंद्र पर अनुशासन और सुव्यवस्था बनी रही।
समग्र रूप से ग्रामीण और पर्वतीय अंचलों से विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने यह साबित किया कि उचित अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण युवा भी बौद्धिक उत्कृष्टता के उच्च मानक स्थापित कर सकते हैं।




















