लोकायुक्त नियुक्ति में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

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सरकार संस्था पर सालाना लगभग दो से तीन करोड़ रुपये खर्च करती है लेकिन आज तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं आखिर क्यों?

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति में लगातार हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है।

शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार को पूर्व आदेशों का पालन न करने पर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए।

लोकायुक्त नियुक्ति को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से पूछा कि पूर्व में दिए गए निर्देशों पर अब तक क्या प्रगति हुई है। इस दौरान महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि नियुक्ति प्रक्रिया अभी जारी है और प्रक्रिया धीमी गति से आगे बढ़ रही है, इसलिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।

इस पर नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को आधे घंटे के भीतर यह बताने का आदेश दिया कि अब तक अदालत के आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया। साथ ही खोज समिति की अगली बैठक की तिथि भी बताने को कहा।

संक्षिप्त स्थगन के बाद राज्य सरकार ने अदालत को जानकारी दी कि खोज समिति की पहली बैठक जून के पहले सप्ताह में संभावित है। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 जून तय करते हुए निर्देश दिया कि तब तक खोज समिति द्वारा लिए गए सभी निर्णय अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं।

पीठ ने टिप्पणी की कि सरकार एक वर्ष पहले भी समय मांग चुकी थी, लेकिन अब तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हो सकी है। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार लगातार समय बढ़ाने का अनुरोध कर रही है।

सरकार ने पहले खोज समिति में कोरम पूरा न होने के कारण बैठक नहीं हो पाने की दलील दी थी, जिस पर अदालत ने चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया था। इससे पहले राज्य सरकार ने पूरी प्रक्रिया के लिए छह महीने का समय मांगा था, लेकिन अदालत ने केवल तीन महीने की मोहलत दी थी।

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