ऊर्जा एवं नैनोविज्ञान की नई तकनीकों पर तीन दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला में सहभागिता करेगा रानीखेत महाविद्यालय

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रानीखेत। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत की विज्ञान लोकप्रियीकरण समिति ने एक बार फिर विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान एवं उभरती तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।

महाविद्यालय की विज्ञान लोकप्रियीकरण समिति आगामी “Nanomaterials for Energy Harvesting and Storage” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कार्यशाला में सहयोगी संस्था (Collaboration Partner) के रूप में सहभागिता करेगी।

यह कार्यशाला 27 से 29 मई 2026 तक MetaChem Academy LLP द्वारा आयोजित की जा रही है, जिसमें देश-विदेश के विद्यार्थी, शोधार्थी एवं वैज्ञानिक प्रतिभाग करेंगे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा संरक्षण, हाइड्रोजन ऊर्जा, नैनोजेनेरेटर्स, बैटरियों, सुपरकैपेसिटर्स तथा आधुनिक ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में नैनोमटेरियल्स की भूमिका को सरल एवं शोध आधारित तरीके से समझाना है।

हाल ही में MetaChem Academy LLP द्वारा विज्ञान लोकप्रियीकरण समिति, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत के साथ शैक्षणिक सहयोग हेतु औपचारिक रुचि पत्र भी भेजा गया, जिसमें महाविद्यालय द्वारा ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों में विज्ञान जागरूकता, शोध संस्कृति, वर्चुअल लैब कार्यक्रमों तथा विद्यार्थियों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ने के प्रयासों की विशेष सराहना की गई। 

कार्यशाला की मुख्य वक्ता डॉ. तानिया रोज अब्राहम, असिस्टेंट प्रोफेसर, स्कूल ऑफ एनर्जी मैटेरियल्स, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, केरल होंगी। डॉ. तानिया ऊर्जा सामग्री एवं नैनोमटेरियल्स के क्षेत्र में अपने महत्वपूर्ण शोध कार्यों के लिए जानी जाती हैं। कार्यशाला में प्रतिभागियों को सौर ऊर्जा, हाइड्रोजन आधारित ऊर्जा प्रणालियाँ, ऊर्जा भंडारण तकनीक, नैनोजेनेरेटर्स तथा आधुनिक शोध आधारित अनुप्रयोगों की जानकारी दी जाएगी।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडे ने इस सहयोग को विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुए कहा कि आज के समय में ऊर्जा एवं नैनो-विज्ञान से जुड़ी तकनीकें भविष्य की वैज्ञानिक दिशा तय कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक गतिविधियों से जोड़ना महाविद्यालय की प्राथमिकता है तथा विज्ञान लोकप्रियीकरण समिति इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रही है।

विज्ञान लोकप्रियीकरण समिति के समन्वयक डॉ. भारत पांडेय ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार एवं शोध के प्रति रुचि विकसित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होती हैं। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान एवं नई तकनीकों तक पहुँच प्रदान करना ही विज्ञान लोकप्रियीकरण समिति का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस अवसर का अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की।

कार्यक्रम की विभागीय समन्वयक डॉ. निधि शर्मा ने बताया कि कार्यशाला में प्रतिभागियों को ऊर्जा क्षेत्र में नैनोमटेरियल्स के वास्तविक उपयोग, आधुनिक शोध तकनीकों तथा भविष्य की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को शोध उन्मुख शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विज्ञान लोकप्रियीकरण समिति की सह-समन्वयक डॉ. स्तुति जोशी ने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से आयोजित होने वाली यह कार्यशाला विशेष रूप से ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि आज डिजिटल एवं वैज्ञानिक शिक्षा के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी बड़े संस्थानों एवं विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिल रहा है, जो उनके आत्मविश्वास एवं ज्ञानवर्धन के लिए महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम की आयोजन टीम में डॉ. सैयद जाहिद हसन भी शामिल हैं। महाविद्यालय प्रशासन एवं विज्ञान लोकप्रियीकरण समिति ने विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं विज्ञान में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों से कार्यशाला में अधिक से अधिक संख्या में प्रतिभाग करने की अपील की है।

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