सेवारत शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग, शिक्षक संघ ने कहा- विश्वास में लिए बिना लिया गया फैसला स्वीकार नहीं
अल्मोड़ा/रानीखेत। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ जनपद अल्मोड़ा की कार्यकारिणी बैठक में सेवारत शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखने की मांग को लेकर 22 जून को देहरादून में प्रस्तावित सचिवालय कूच को सफल बनाने की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में सरकार द्वारा टीईटी आवेदन को लेकर संभावित शासनादेश की तैयारियों पर भी नाराजगी व्यक्त की गई।
बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने कहा कि समाचार पत्रों के माध्यम से जानकारी मिली है कि सरकार वर्तमान में सेवारत शिक्षकों को टीईटी आवेदन के लिए अर्ह करने संबंधी व्यवस्था का ड्राफ्ट तैयार कर रही है। इस खबर से प्रदेश के प्रारंभिक शिक्षकों में भारी आक्रोश है। शिक्षकों का कहना है कि टीईटी से संबंधित कोई भी निर्णय लेने से पहले सरकार और शिक्षा विभाग को शिक्षक संगठनों को विश्वास में लेना चाहिए।
जिलाध्यक्ष किशोर जोशी ने कहा कि संगठन शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से पूर्ण छूट देने की मांग करता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार टीईटी समस्या का समाधान करना चाहती है तो सेवारत शिक्षकों के लिए वर्ष में कम से कम तीन बार पृथक टीईटी परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि वरिष्ठ शिक्षकों को उनकी लंबी सेवाओं का लाभ देते हुए प्रति वर्ष दो बोनस अंक प्रदान किए जाएं। सेवा अवधि के आधार पर बोनस अंक जोड़कर पृथक से सेवारत टीईटी की व्यवस्था शासनादेश में शामिल की जानी चाहिए।
किशोर जोशी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार शिक्षकों के हितों की अनदेखी कर कोई अन्य शासनादेश जारी करती है तो उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ उसका विरोध करेगा, टीईटी परीक्षा का बहिष्कार करेगा तथा आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने बताया कि 22 जून के सचिवालय कूच के बाद प्रांतीय एवं जनपदीय पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक में आगामी रणनीति तय की जाएगी।
बैठक में जिला मंत्री जगदीश भंडारी, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह, प्रकाश जोशी, मनोज विष्ट, अनिल कांडपाल, मनोज पाठक, दिनेश भंडारी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

