17 दिन पहले शुरू हुआ था आवागमन, पुल सुरक्षित लेकिन एप्रोच रोड धंसने से बढ़ी लोगों की चिंता
देहरादून। देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पर हाल ही में करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया नया पुल एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
लंबे इंतजार के बाद 12 जुलाई को इस पुल को वाहनों की आवाजाही के लिए खोला गया था, लेकिन पहली ही बड़ी मॉनसूनी बारिश ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारी बारिश के चलते पुल के एक छोर पर बनी एप्रोच रोड का बड़ा हिस्सा धंस गया, जिसके बाद प्रशासन ने एहतियातन पुल पर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही तत्काल रोक दी।
सोमवार सुबह स्थानीय लोगों ने पुल के पास सड़क धंसने की सूचना प्रशासन को दी। सूचना मिलते ही पुलिस, लोक निर्माण विभाग (PWD) और संबंधित निर्माण एजेंसी की टीम मौके पर पहुंची। शुरुआती तस्वीरों में सड़क पर बड़ा गड्ढा दिखाई देने के कारण लोगों में पुल के धंसने की आशंका फैल गई।
हालांकि जांच के बाद पुलिस ने स्पष्ट किया कि मुख्य पुल पूरी तरह सुरक्षित है। क्षति केवल एप्रोच रोड पर हुई है, जहां लगातार बारिश के कारण सड़क के नीचे की मिट्टी बह जाने से धंसाव हो गया।
पुलिस ने बताया पुल सुरक्षित
प्रेमनगर कोतवाली पुलिस के अनुसार, 28 जुलाई की सुबह पुलिया क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिलने पर तत्काल मौके का निरीक्षण किया गया।
जांच में पाया गया कि पुल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। लगातार बारिश से एप्रोच रोड के नीचे की मिट्टी बह जाने के कारण सड़क का हिस्सा धंस गया है। संबंधित निर्माण एजेंसी ने मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है और जल्द से जल्द यातायात बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पिछले साल क्षतिग्रस्त हुआ था पुराना पुल
टौंस नदी पर बना पुराना पुल पिछले वर्ष मॉनसून के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल का निर्माण कराया।
निर्माण पूरा होने के बाद 12 जुलाई से इस पुल पर यातायात शुरू किया गया था। लेकिन महज 17 दिन के भीतर ही एप्रोच रोड के धंस जाने से निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
पहले अस्थायी पुलिया भी बह चुकी है
इससे पहले 11 जुलाई की रात टौंस नदी में आए तेज बहाव के कारण ह्यूम पाइप डालकर बनाई गई अस्थायी पुलिया भी बह गई थी। इसके चलते देहरादून और विकासनगर के बीच संपर्क पूरी तरह प्रभावित हो गया था। बाद में पीडब्ल्यूडी ने तेजी से कार्य करते हुए मुख्य पुल तैयार किया और 12 जुलाई से यातायात शुरू कराया। अब उसी पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
यातायात पूरी तरह बंद, वैकल्पिक मार्गों पर दबाव
घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर पुल पर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही रोक दी है। मौके पर बैरिकेडिंग कर पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि कोई भी वाहन क्षतिग्रस्त हिस्से तक न पहुंच सके। यातायात को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया गया है, जिससे लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है और आवागमन में परेशानी हो रही है।
निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल, जांच की मांग
लगातार दूसरी बार इसी स्थान पर सड़क और पुल से जुड़ी संरचना प्रभावित होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए पुल से वर्षों तक सुरक्षित और निर्बाध यातायात की उम्मीद थी, लेकिन पहली ही मॉनसूनी बारिश में एप्रोच रोड धंस जाना गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है। स्थानीय नागरिकों ने पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों व एजेंसी की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
मरम्मत शुरू, तकनीकी जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
घटना के बाद संबंधित विभाग के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और क्षतिग्रस्त एप्रोच रोड की मरम्मत का कार्य शुरू करा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही धंसाव के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम भी उठाए जाएंगे।
फिलहाल करोड़ों रुपये की लागत से बने इस नए पुल की पहली ही बारिश में सामने आई समस्या ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


