तल्ला सल्ट (अल्मोड़ा)।अखिल भारतीय शिक्षा समागम-2026 के अंतर्गत राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के छह वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राजकीय महाविद्यालय तल्ला सल्ट में एक विचारोत्तेजक संकाय पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा नीति के विभिन्न आयामों, उपलब्धियों, चुनौतियों तथा विद्यालय और उच्च शिक्षा पर उसके प्रभावों को लेकर गहन मंथन किया गया। वक्ताओं ने नई शिक्षा नीति को शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राघव कुमार झा ने की, जबकि संयोजन राजनीति विज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. निधि गोस्वामी ने किया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री विद्यालय राजकीय इंटर कॉलेज, नेवलगांव (अल्मोड़ा) के प्रधानाचार्य मोहम्मद यासीन तथा भौतिक विज्ञान प्रवक्ता रघुनाथ सिंह रावत विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
विशेष अतिथियों ने विद्यालयी शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, कौशल आधारित शिक्षा, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा विद्यालय एवं उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को केवल परीक्षा केंद्रित नहीं बल्कि रोजगारोन्मुख, नवाचारी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
पैनल चर्चा में समाजशास्त्र विभाग के डॉ. चन्द्र गोस्वामी, अंग्रेज़ी विभाग की डॉ. ऋतिका गिरी गोस्वामी, हिन्दी विभाग के डॉ. गिरीश चन्द्र, राजनीति विज्ञान विभाग की डॉ. निधि गोस्वामी तथा संस्कृत विभाग के प्राचार्य डॉ. राघव कुमार झा ने अपने-अपने विषयों के दृष्टिकोण से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया।
वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा को अधिक समग्र, बहुविषयक, विद्यार्थी-केंद्रित और कौशल आधारित बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है। चर्चा के दौरान मातृभाषा में शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, बहुभाषिकता, व्यावसायिक शिक्षा, अनुसंधान संस्कृति, डिजिटल शिक्षण, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम निर्माण तथा समावेशी शिक्षा जैसे विषयों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया।
पैनलिस्टों ने यह भी कहा कि नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता, मजबूत आधारभूत संरचना, डिजिटल संसाधनों का विस्तार तथा ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही मूल्यांकन प्रणाली में सुधार, नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों में आलोचनात्मक एवं रचनात्मक सोच विकसित करने पर भी बल दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे और अपने विचार भी साझा किए। विशेषज्ञों ने उनकी जिज्ञासाओं का विस्तार से समाधान किया और नीति के व्यावहारिक पक्षों को सरल भाषा में समझाया।
समापन अवसर पर प्राचार्य डॉ. राघव कुमार झा ने सभी अतिथियों, पैनलिस्टों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक विमर्श राष्ट्रीय शिक्षा नीति की गहन समझ विकसित करने के साथ-साथ उसके प्रभावी क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे अकादमिक आयोजनों के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता और नवाचार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।


