रानीखेत: भू-धंसाव से सहमे ग्रामीण: मकानों में आई दरारें, सुरक्षा दीवारें ढही, 20 से 30 मकानों पर मंडराया खतरा

ग्रामीणों ने प्रशासन से समय पर सुरक्षा उपाय और राहत कार्य चलाने की उठाई मांग।

रानीखेत के धुराफाट में भू-धंसाव का कहर, 30 मकानों पर खतरा; विस्थापन की पहल करेंगे विधायक

भारी बारिश के बाद धुराफाट क्षेत्र में भू-धंसाव, ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई सुरक्षा की गुहार

रिपोर्ट– बलवन्त सिंह रावत 

तेलगांव और तल्ली सीम में मकानों पर आईं बड़ी-बड़ी दरारें, सुरक्षा दीवारें ढहीं; विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल ने अधिकारियों के साथ किया स्थलीय निरीक्षण

रानीखेत। विकासखंड ताड़ीखेत के धुराफाट क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम सभा नौधर के समीप तेलगांव और तल्ली सीम में लगातार हो रहे भू-धंसाव ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र में जमीन धंसने और भूस्खलन की घटनाओं के चलते कई मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। वहीं, घरों की सुरक्षा के लिए बनाई गई रिटेनिंग वॉल और अन्य सुरक्षा दीवारें भी क्षतिग्रस्त होकर ढह चुकी हैं। ऐसे में करीब 20 से 30 मकानों पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों में भय का माहौल है और उन्हें किसी बड़ी अनहोनी की आशंका सता रही है।

क्षेत्र की गंभीर स्थिति को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल ने तहसीलदार दीपिका आर्या, भूगर्भ विभाग के अधिकारियों, खंड विकास अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं और राजस्व विभाग की टीम के साथ प्रभावित क्षेत्र का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने प्रभावित स्थानों का जायजा लेकर भू-धंसाव के कारणों और उससे बचाव के संभावित उपायों पर चर्चा की।

भारी बारिश के बाद बढ़ी समस्या, मकानों में आईं दरारें

निरीक्षण के दौरान विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल ने कहा कि पिछले दिनों हुई भारी बारिश के बाद पूरे गांव में जमीन पर बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। इसके साथ ही क्षेत्र में भूस्खलन की समस्या भी गंभीर हो गई है। उन्होंने बताया कि स्थिति ऐसी है कि लगभग 20 से 30 मकानों को भूस्खलन से काफी खतरा बना हुआ है। प्रभावित परिवारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया गया।

विधायक ने बताया कि निरीक्षण के दौरान सभी संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ इस बात पर विचार-विमर्श किया गया कि भू-धंसाव और भूस्खलन से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए कौन-कौन से प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक तकनीकी पहलुओं का परीक्षण करने और बचाव के उपाय तलाशने के निर्देश दिए।

डॉ. नैनवाल ने कहा कि उन्होंने भूगर्भ विशेषज्ञों और राजस्व विभाग के अधिकारियों से भू-धंसाव की स्थिति का तकनीकी आकलन कर यह पता लगाने को कहा है कि इस समस्या को किस हद तक रोका जा सकता है। प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा के प्रभावी उपायों को लेकर एक अनुमानित लागत का प्रस्ताव भी तैयार कर प्रस्तुत किया गया है, ताकि आवश्यक कार्यों की दिशा में आगे की कार्रवाई की जा सके।

उन्होंने कहा कि यदि भू-धंसाव को रोकना संभव हुआ तो इसके लिए जरूरी कदम उठाने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, यदि प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के लिए विस्थापन आवश्यक पाया जाता है, तो वह इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अनुरोध करेंगे। विधायक ने प्रभावित ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करने की बात कही।

ग्रामीणों ने तत्काल सुरक्षा कार्य शुरू कराने की उठाई मांग

भू-धंसाव से प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि मकानों में दरारें बढ़ने और सुरक्षा दीवारें ढहने से उनकी चिंता लगातार बढ़ रही है। उन्हें डर है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रभावित स्थानों पर तत्काल चेक वॉल, रिटेनिंग वॉल और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपायों का निर्माण कराने की मांग की है।

वहीं, कनिष्ठ प्रमुख जीवन बुथानी ने शासन और स्थानीय प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराने की गुहार लगाई है। उन्होंने प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की।

फिलहाल क्षेत्र के ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि भूगर्भीय स्थिति का जल्द तकनीकी आकलन कर प्रभावित मकानों और परिवारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, ताकि संभावित जन-धन की हानि को रोका जा सके।

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