जनदबाव के आगे झुका शिक्षा विभाग, च्यूरीगाड़ स्कूल फिर खुलेगा, दो शिक्षकों की तैनाती
नैनीताल। भीमताल विधानसभा क्षेत्र के धारी विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत च्यूरीगाड़ के जूनियर हाई स्कूल को बंद करने के शिक्षा विभाग के निर्णय के खिलाफ क्षेत्रवासियों का आंदोलन रंग ले आया।
वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरु के नेतृत्व में 6 जुलाई को पंचायत भवन परिसर में आयोजित धरना-प्रदर्शन के बाद शिक्षा विभाग ने अपने 2 जुलाई के आदेश को निरस्त कर विद्यालय को पुनः संचालित करने तथा यहां दो शिक्षकों की नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए हैं।
च्यूरीगाड़ जूनियर हाई स्कूल की स्थापना वर्ष 1986 में हुई थी। हाल ही में शिक्षा विभाग ने छात्र संख्या कम होने का हवाला देते हुए विद्यालय को बंद करने का निर्णय लिया था।
साथ ही यहां अध्ययनरत विद्यार्थियों को लगभग तीन किलोमीटर दूर पुटगांव जूनियर हाई स्कूल में प्रवेश लेने के निर्देश दिए गए थे।
इस फैसले का क्षेत्रवासियों ने कड़ा विरोध किया। ग्रामीणों का कहना था कि बच्चों को घने जंगल और दुर्गम रास्तों से होकर दूसरे विद्यालय भेजना उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। इसी के विरोध में पंचायत भवन परिसर में धरना-प्रदर्शन किया गया और सरकार तथा शिक्षा विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई।
धरने के दौरान वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरु ने जिलाधिकारी नैनीताल तथा मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) से दूरभाष पर वार्ता कर विद्यालय को तत्काल पुनः खोलने और शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर विद्यालय नहीं खोला गया, तो मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
पनेरु ने क्षेत्रीय विधायक और सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार सरकारी विद्यालयों को कमजोर कर निजी स्कूलों को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि निजी विद्यालयों की बढ़ती फीस आम परिवारों की पहुंच से बाहर होती जा रही है। उनका दावा था कि पिछले पांच वर्षों में उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में 826 से अधिक सरकारी प्राथमिक विद्यालय स्थायी रूप से बंद किए जा चुके हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है और पलायन को भी बढ़ावा मिला है।
आंदोलन और जनदबाव के बाद शिक्षा विभाग ने अपने पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए च्यूरीगाड़ जूनियर हाई स्कूल को पुनः संचालित करने तथा यहां दो शिक्षकों की तैनाती के नए आदेश जारी कर दिए हैं। इस निर्णय से क्षेत्रवासियों में खुशी का माहौल है।
ग्रामीणों ने इसे जनएकजुटता और शांतिपूर्ण आंदोलन की बड़ी सफलता बताते हुए उम्मीद जताई कि अब क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा पहले की तरह सुचारु रूप से जारी रहेगी।

