आशा कार्यकर्ताओं ने 7 सूत्रीय मांगों को लेकर खोला मोर्चा, 22 नवंबर को सीएम आवास कूच की चेतावनी

आशा कार्यकर्ताओं ने 7 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी

रिपोर्ट– बलवन्त सिंह रावत 

रानीखेत। उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (एटक) ने आशा कार्यकर्ताओं की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। यूनियन ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर आशा कार्यकर्ताओं को न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा, पेंशन और बढ़ा हुआ मानदेय सहित सात सूत्रीय मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की है।

यूनियन के आह्वान पर 29 सितंबर 2026 को प्रदेशभर में धरना-प्रदर्शन कर सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखी गईं। रानीखेत में भी आशा कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और मांगों के शीघ्र समाधान की मांग उठाई।

यूनियन ने कहा कि आशा कार्यकर्ता ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। गर्भवती महिलाओं की देखभाल, टीकाकरण, स्वास्थ्य जागरूकता, विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियानों और विभागीय कार्यक्रमों में आशाओं की सक्रिय भागीदारी रहती है। इसके बावजूद उन्हें उनके कार्य के अनुरूप पर्याप्त मानदेय और सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

मानदेय बढ़ाने और कर्मचारी का दर्जा देने की मांग

आशा कार्यकर्ताओं ने मासिक मानदेय ₹11,500 किए जाने संबंधी प्रस्ताव को लागू करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्हें न्यूनतम वेतन के दायरे में लाने तथा नियमित कर्मचारी का दर्जा देने की मांग भी उठाई गई है। यूनियन का कहना है कि लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग के साथ कार्य करने वाली आशाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन की व्यवस्था जरूरी है।

इसके अलावा आशा कार्यकर्ताओं ने सेवानिवृत्ति के समय ₹10 लाख की एकमुश्त धनराशि देने, नेशनल हेल्थ मिशन का बजट बढ़ाने, आशाओं को मनमाने तरीके से हटाने पर रोक लगाने तथा सरकारी अस्पतालों में रिक्त विशेषज्ञ चिकित्सकों के पदों को शीघ्र भरने की मांग की है।

24 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन

यूनियन ने सरकार को आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम भी बताया है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि सरकार ने मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो 24 अक्टूबर 2026 को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा।

इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं होने पर 22 नवंबर 2026 को देहरादून में मुख्यमंत्री आवास कूच किया जाएगा। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित आंदोलन के बावजूद यदि सरकार ने मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया तो इसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाया जाएगा।

सरकार से समय रहते समाधान की अपील

यूनियन पदाधिकारियों ने सरकार से अपील की कि आंदोलन के अगले चरण की नौबत आने से पहले आशा कार्यकर्ताओं की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए ठोस निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराना आवश्यक है।

धरना-प्रदर्शन में अध्यक्ष कमला जोशी, नेहा माहरा, कुसुम जोशी, शोभा पंत, शांति देवी, शीला चौधरी, आशा बिष्ट, होरा नेगी, गीता भंडारी, शोभा बिष्ट, अलका जोशी, चम्पा मेहरा, शांति रावत, नन्दी पवन, माया, गरिमा सिंह, लीला जोशी, भगवती देवी, पूनम बिष्ट और गीता देवी सहित बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।

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