टनकपुर पहुंचे सीएम धामी, खिलाड़ियों से किया संवाद; दशहरा महोत्सव में लिया भाग, बोले—विकास के साथ विरासत का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता

टनकपुर दशहरा महोत्सव में उमड़ा आस्था और संस्कृति का संगम, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया प्रतिभाग

श्रीमद्भागवत कथा का किया श्रवण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच मुख्यमंत्री का हुआ भव्य स्वागत

टनकपुर (चंपावत)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार को अपनी विधानसभा चंपावत के टनकपुर पहुंचे। टनकपुर आगमन पर जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले स्पोर्ट्स हॉस्टल टनकपुर पहुंचकर वहां रह रहे खिलाड़ियों से आत्मीय संवाद किया और उनका उत्साहवर्धन किया।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से मुलाकात की और मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने ‘मुख्य सेवक संवाद’ कार्यक्रम में प्रतिभाग कर आमजन से सीधा संवाद किया। मुख्यमंत्री ने लोगों की समस्याएं और सुझाव सुने तथा क्षेत्र के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की।

इसके उपरांत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नवयुवक रामलीला कमेटी की ओर से टनकपुर में आयोजित दशहरा महोत्सव में शामिल हुए। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही माहौल उत्साह, आस्था और उल्लास से भर गया। स्थानीय लोगों एवं नवयुवक रामलीला कमेटी की ओर से पारंपरिक छोलिया नृत्य के साथ मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण किया। इस दौरान बाबा नीम करौली महाराज पर आधारित भक्ति संगीत ‘मैंने तेरे ही भरोसे भगवान, सागर में नैया डार देई’ को उन्होंने भक्तिभाव से सुना। बालिकाओं की सुंदर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में देवभूमि की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की मनमोहक झलक प्रस्तुत की।

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन अपने आप में अत्यंत दिव्य होता है। जहां भागवत विराजमान होती है और श्रद्धा के साथ कथा का आयोजन किया जाता है, वहां भगवान की कृपा अवश्य होती है। उन्होंने कहा कि मां पूर्णागिरि और मां शारदा की पावन धरती पर धार्मिक आयोजनों का महत्व और भी बढ़ जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक परंपराएं और त्योहार समाज को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य करते हैं। साथ ही ये आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, संस्कारों और आध्यात्मिक विरासत से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास और विरासत को साथ लेकर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भगवान से प्रार्थना करते हुए कहा कि उत्तराखंड निरंतर समृद्धि के पथ पर आगे बढ़े और भारत शीघ्र विकसित राष्ट्र बनकर हर क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में उत्तराखंड अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड में विकास के साथ-साथ संस्कृति, धार्मिक विरासत और आध्यात्मिक पहचान के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी संकल्प के तहत आदर्श जनपद चंपावत में भी विकास की अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं।

उन्होंने बताया कि टनकपुर में लगभग 237.74 करोड़ रुपये की लागत से आईएसबीटी का निर्माण, शारदा घाट का पुनर्विकास एवं सौंदर्यीकरण, गोल्ज्यू कॉरिडोर, मां पूर्णागिरि क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार तथा विभिन्न मंदिरों के सौंदर्यीकरण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार ये योजनाएं चंपावत जनपद को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगी।

उन्होंने कहा कि मां पूर्णागिरि धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ककराली गेट से पूर्णागिरि धाम की ओर लगभग 8.10 करोड़ रुपये की लागत से प्रकाश व्यवस्था विकसित की जा रही है। धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही सड़क, परिवहन, पर्यटन, खेल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि ‘आदर्श चंपावत’ का संकल्प जनपद के समग्र विकास का संकल्प है।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि चंपावत की प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और पर्यटन की संभावनाओं को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर ऐसा विकास मॉडल तैयार किया जाए, जिसमें विकास के साथ विरासत का संरक्षण हो और सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे।

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