रानीखेत। सांस्कृतिक समिति रानीखेत के तत्वावधान में मिशन इंटर कॉलेज में दो दिवसीय कुमाऊँनी ऐपण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ।
कार्यशाला में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं, शिक्षिकाओं और नगर की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पारंपरिक ऐपण कला की बारीकियां सीखीं।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए समिति के अध्यक्ष विमल सती ने कहा कि ऐपण कुमाऊं क्षेत्र की प्राचीन लोक कला है, जिसकी परंपरा चंद राजवंश के समय से चली आ रही है।
उन्होंने बताया कि त्योहारों और मांगलिक अवसरों—जैसे विवाह, जन्म और यज्ञोपवीत—पर घर की देहरी, आंगन और पूजा स्थल पर गेरू व बिस्वार से बनाए जाने वाले ऐपण शुभता और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। उन्होंने इस कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया।
प्रशिक्षक ज्योति साह ने कहा कि ऐपण लोक आस्था का अभिन्न हिस्सा है, जिसे पौराणिक काल से आध्यात्म और तंत्र-मंत्र से जोड़ा जाता रहा है। उन्होंने बताया कि ऐपण घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का संदेश देते हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उंगलियों से ज्यामितीय आकृतियां बनाना सिखाया गया। साथ ही धूली अर्घ्य चौकी, सरस्वती चौकी और शिव पीठ समेत छह प्रकार की पारंपरिक चौकियां बनाना भी सिखाया गया।
कार्यशाला शनिवार को भी जारी रहेगी। इस अवसर पर गौरव भट्ट, गीता जोशी, सोनू सिद्दीकी, विनीता खाती, दीपक पंत, राजेन्द्र पंत, अभिषेक कांडपाल और गौरव तिवारी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

