पहाड़ की बेटियों को विज्ञान की नई उड़ान: रानीखेत महाविद्यालय में ‘She for STEM – Cohort 2.0’ का शानदार आगाज़
विधायक प्रमोद नैनवाल ने वैश्विक STEM एक्सेलरेटर कार्यक्रम में चयनित पांच छात्राओं को किया सम्मानित, अंतरराष्ट्रीय मेंटरशिप, शोध और नवाचार के अवसरों से रूबरू हुईं छात्राएं
रानीखेत। पर्वतीय क्षेत्रों की प्रतिभाशाली बेटियों को विज्ञान, तकनीक, शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने की दिशा में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत में ‘She for STEM – Uttarakhand Cohort 2.0’ के तहत ओरिएंटेशन एवं हैंड्स-ऑन साइंस कार्यशाला का उत्साहपूर्वक आयोजन किया गया। उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखंड सरकार, उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) और विज्ञानशाला इंटरनेशनल की संयुक्त पहल के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं को वैज्ञानिक सोच विकसित करने, प्रयोगों के माध्यम से सीखने तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध शैक्षणिक एवं व्यावसायिक अवसरों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों की छात्राओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में प्रोत्साहित करना तथा उन्हें आधुनिक वैज्ञानिक संसाधनों, अनुभवी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और शोध के अवसरों से जोड़ना रहा। कार्यशाला के माध्यम से छात्राओं को यह समझाने का प्रयास किया गया कि सीमित संसाधन और भौगोलिक परिस्थितियां उनकी प्रतिभा एवं महत्वाकांक्षाओं के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए।
वैश्विक एक्सेलरेटर कार्यक्रम में चयनित पांच छात्राओं का सम्मान
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण ‘कल्पना: She for STEM’ के एक्सेलरेटर कार्यक्रम में चयनित महाविद्यालय की पांच छात्राओं का सम्मान रहा। रानीखेत के विधायक प्रमोद नैनवाल ने रितु मेहरा, ज्योति, तनिशा आर्या, हर्षिता फर्त्याल और भावना बिष्ट को सम्मानित करते हुए उनकी उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने छात्राओं की सफलता को अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक बताया।
इन छात्राओं के चयन को महाविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। चयनित छात्राओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सही मार्गदर्शन, निरंतर प्रयास और उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाना बेहद जरूरी है। उन्होंने अन्य छात्राओं को भी अपने भीतर वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करने और नए विषयों पर काम करने के लिए प्रेरित किया।
प्रतिभा को अवसर मिले तो वैश्विक पहचान बना सकती हैं पहाड़ की बेटियां
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडेय ने चयनित छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की बेटियों में प्रतिभा और क्षमता की कोई कमी नहीं है। जरूरत उन्हें उचित मार्गदर्शन, आधुनिक संसाधन और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की है। उन्होंने कहा कि ‘She for STEM’ जैसी पहल छात्राओं को विश्वस्तरीय विशेषज्ञों से सीखने और विज्ञान के क्षेत्र में अपने सपनों को साकार करने का अवसर प्रदान करती है।
उन्होंने इस प्रकार के कार्यक्रमों को छात्राओं के शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए संस्थानों को निरंतर प्रयास करने चाहिए। इससे छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ने के साथ ही उनमें नेतृत्व क्षमता और नवाचार के प्रति रुचि भी विकसित होगी।
तीन माह का इनक्यूबेटर और 20 सप्ताह का एक्सेलरेटर कार्यक्रम
कार्यक्रम में डॉ. भारत पांडेय, जिला समन्वयक, यूकॉस्ट अल्मोड़ा तथा She for STEM के समन्वयक एवं फैकल्टी मेंटर ने योजना की रूपरेखा, उद्देश्यों और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पहल के अंतर्गत छात्राओं को तीन माह के इनक्यूबेटर कार्यक्रम और 20 सप्ताह के एक्सेलरेटर कार्यक्रम के माध्यम से अपनी वैज्ञानिक समझ, कौशल और नवाचार संबंधी क्षमताओं को विकसित करने का अवसर मिलता है।
उन्होंने वैश्विक मेंटरशिप, वैज्ञानिक परियोजनाओं, छात्रवृत्तियों, इंटर्नशिप, उच्च शिक्षा और करियर निर्माण से जुड़े विभिन्न अवसरों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल छात्राओं को विज्ञान की जानकारी देना नहीं, बल्कि उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और समस्याओं के समाधान खोजने की योग्यता विकसित करना भी है।
डॉ. भारत पांडेय ने कहा कि प्रतिभा किसी शहर, क्षेत्र या संसाधन की मोहताज नहीं होती। सही मार्गदर्शन, अवसर और आत्मविश्वास मिलने पर पहाड़ की बेटियां भी विज्ञान की दुनिया में वैश्विक पहचान बना सकती हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस पहल से रानीखेत और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों की अधिक से अधिक छात्राएं विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगी।
प्रयोगों के जरिए समझाया विज्ञान का महत्व
विज्ञानशाला इंटरनेशनल के स्टेट हैंड्स-ऑन साइंस कोऑर्डिनेटर सौरभ जोशी ने छात्राओं को प्रयोग आधारित विज्ञान शिक्षा के महत्व से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल पुस्तकों में लिखे सिद्धांतों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रश्न पूछने, अवलोकन करने, प्रयोग करने और समस्याओं का समाधान खोजने की निरंतर प्रक्रिया है।
कार्यशाला के दौरान विभिन्न रोचक एवं व्यावहारिक वैज्ञानिक गतिविधियों के माध्यम से छात्राओं को वैज्ञानिक सिद्धांतों को सरल तरीके से समझाया गया। इन गतिविधियों ने छात्राओं को विज्ञान को नजदीक से जानने और उसे अपने दैनिक जीवन से जोड़कर देखने का अवसर प्रदान किया।
सौरभ जोशी ने छात्राओं को जिज्ञासु बने रहने, नए विचारों पर काम करने और प्रयोगों के माध्यम से सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि व्यावहारिक अनुभव विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने और जटिल अवधारणाओं को आसानी से समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
महिला सशक्तीकरण और वैज्ञानिक चेतना को मिलेगा बढ़ावा
कार्यक्रम का सफल आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडेय के मार्गदर्शन तथा डॉ. भारत पांडेय और डॉ. निधि शर्मा के समन्वय से संपन्न हुआ। आयोजन ने यह संदेश दिया कि ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों की छात्राओं को यदि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक वैज्ञानिक संसाधन और वैश्विक स्तर पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए, तो वे भी विज्ञान, तकनीक और शोध के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।
‘She for STEM – Uttarakhand Cohort 2.0’ जैसी पहल उत्तराखंड की बेटियों के लिए विज्ञान के नए द्वार खोलने के साथ ही उनमें नवाचार, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने में सहायक हो सकती है। रानीखेत महाविद्यालय में आयोजित यह कार्यशाला छात्राओं को अपनी प्रतिभा पहचानने, वैज्ञानिक सपनों को दिशा देने और भविष्य में नए मुकाम हासिल करने के लिए प्रेरित करने वाली पहल के रूप में सामने आई।


