49 लोगों पर दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष जांच की मांग, मंदिर परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए राज्यव्यापी जागरूकता अभियान चलाने का ऐलान
हल्द्वानी/रानीबाग। नैनीताल जिले के रानीबाग स्थित ऐतिहासिक चित्रशिला धाम एवं माता जिया रानी मंदिर परिसर में कथित अतिक्रमण का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। मंदिर परिसर की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग को लेकर पहाड़ी आर्मी उत्तराखंड का जन हस्ताक्षर अभियान 22वें दिन भी जारी रहा। संगठन की ओर से एक अक्टूबर से शुरू किए गए इस अभियान के तहत नैनीताल रोड सहित विभिन्न स्थानों पर लोगों से हस्ताक्षर कराकर इस मुद्दे पर जनसमर्थन जुटाया जा रहा है।
पहाड़ी आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत ने आरोप लगाया कि कत्यूरी वंश की आराध्य देवी माता जिया रानी की तपोभूमि और पवित्र चित्रशिला धाम में शनि मंदिर के नाम पर स्थायी निर्माण कर मंदिर के पारंपरिक आंगन और मेले की भूमि को घेरा जा रहा है। उनका कहना है कि इस निर्माण के कारण माता जिया रानी की गुफा से होने वाले पवित्र शिला के दर्शन भी प्रभावित हो रहे हैं। गार्गी नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक चित्रशिला की धार्मिक एवं सांस्कृतिक मान्यताओं के साथ भी छेड़छाड़ की जा रही है।
हरीश रावत ने दावा किया कि संबंधित भूमि राजस्व अभिलेखों में माता जिया रानी एवं चित्रेश्वर महाराज चित्रशिला घाट के नाम से दर्ज है। ऐसे में किसी व्यक्ति द्वारा इस भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने और स्थायी निर्माण करने का अधिकार कैसे प्राप्त हुआ, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी मंदिर समिति की भूमि पर चौपाटी विकसित करने की आड़ में कब्जे का प्रयास किया गया था। उस समय पहाड़ी आर्मी ने आंदोलन किया था, जिसके बाद सरकार ने संबंधित निर्माण को ध्वस्त कराया था।
49 लोगों पर मुकदमे दर्ज कराने का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
हरीश रावत ने 29 अगस्त को रानीबाग में आयोजित कत्यूरी पहाड़ी समाज की महापंचायत का जिक्र करते हुए कहा कि महापंचायत के बाद जब समाज के लोग मंदिर में दर्शन करने पहुंचे तो कथित तौर पर हेमंत कुमार गुप्ता ने दर्शनार्थियों पर जानलेवा हमला कर दिया। आरोप है कि इस दौरान धारदार डेक के ढक्कन फेंके गए। घटना का विरोध करने पर हेमंत गुप्ता की ओर से कत्यूरी समाज के 49 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए गए। पहाड़ी आर्मी अध्यक्ष हरीश रावत समेत करीब आधा दर्जन लोगों को हिरासत में भी लिया गया।
संगठन का आरोप है कि इस पूरे मामले में राजनीतिक दबाव के चलते एकतरफा कार्रवाई हुई है। पहाड़ी आर्मी ने सभी मुकदमों की निष्पक्ष जांच कराने और घटना की वास्तविक परिस्थितियों को सामने लाने की मांग की है।
चित्रेश्वर महादेव मंदिर के प्राचीन स्वरूप से छेड़छाड़ का आरोप
हरीश रावत ने आरोप लगाया कि पौराणिक चित्रेश्वर महादेव मंदिर परिसर में बिना आवश्यक अनुमति के शनि मंदिर का ढांचा तैयार किया गया है। वर्तमान में वहां दो और तीन मंजिला निर्माण, कमरे और टीन शेड बनाए गए हैं। उनका दावा है कि इस निर्माण के कारण मंदिर परिसर की लगभग दो-तिहाई भूमि घिर गई है और मंदिर का प्राचीन स्वरूप प्रभावित हुआ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि 27 जुलाई 2026 को संबंधित निर्माण संचालकों ने मंदिर के शिखर तक एंगल गाड़कर पूरे परिसर को प्रभावित किया। इसकी सूचना तत्काल राजस्व विभाग और उपजिलाधिकारी को दी गई थी।
हरीश रावत के अनुसार, अगस्त 2025 में कत्यूरी समाज के प्रतिनिधियों ने रात के समय किए जा रहे दो मंजिला अवैध निर्माण की शिकायत राजस्व निरीक्षक रानीबाग और हल्द्वानी स्थित विकास प्राधिकरण से लिखित रूप में की थी। इसके बाद प्राधिकरण ने 12 अगस्त 2025 को इस निर्माण को वाद संख्या यू०सी०एम०एस०/एन०डी०ए०/आर०/0873/2025 में दर्ज किया था। संगठन का आरोप है कि इसके बावजूद लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि 10 नवंबर 2025 को प्राधिकरण ने अपने निर्णय में इस निर्माण का संज्ञान लेते हुए ढांचे को हटाने के आदेश दिए थे, लेकिन संबंधित व्यक्ति द्वारा कथित रूप से आदेशों की अनदेखी करते हुए निर्माण जारी रखा गया और इसके आगे बड़ा टीन शेड भी लगा दिया गया।
संगठन का यह भी आरोप है कि निर्माण के दौरान मंदिर के गुंबद को बंद किया गया, मोटी लोहे की रॉड और मशीनों की सहायता से मंदिर परिसर में काम किया गया, नींव खोदी गई तथा माता जिया रानी की तपोभूमि को टीन शेड से ढक दिया गया। पहाड़ी आर्मी ने इन सभी आरोपों की प्रशासनिक एवं तकनीकी जांच कराने की मांग उठाई है।
शनिदेव के विरोध में नहीं, पौराणिक मंदिर की भूमि बचाने के लिए आंदोलन: हरीश रावत
हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि पहाड़ी आर्मी और कत्यूरी समाज शनिदेव के विरोधी नहीं हैं। सनातन परंपरा में शनिदेव का विशेष धार्मिक महत्व है और उन्हें न्याय का देवता माना जाता है। संगठन का विरोध किसी देवी-देवता या धार्मिक आस्था से नहीं, बल्कि पौराणिक शिव मंदिर परिसर में कथित अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण से है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मंदिर परिसर का तत्काल राजस्व विभाग की टीम से सीमांकन कराया जाए। भूमि से संबंधित राजस्व अभिलेख, निर्माण की अनुमति और विकास प्राधिकरण की ओर से जारी आदेशों की स्थिति सार्वजनिक की जाए। साथ ही, यदि निर्माण अवैध पाया जाता है तो नियमानुसार उसे हटाकर ऐतिहासिक मंदिर परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
राज्यव्यापी जागरूकता अभियान के बाद होगा रानीबाग कूच
हरीश रावत ने कहा कि अभी प्रदेश के बड़े हिस्से में इस पूरे प्रकरण की जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच पाई है। इसलिए पहाड़ी आर्मी जल्द ही राज्यव्यापी जागरूकता भ्रमण कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। इसके बाद पहाड़ की जनता को एकजुट कर रानीबाग कूच का बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कत्यूरी राजवंश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी इस भूमि को कथित कब्जे से मुक्त कराने के लिए संगठन अपना आंदोलन जारी रखेगा। फिलहाल 22वें दिन भी हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से जनसमर्थन जुटाने का सिलसिला जारी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में सीमांकन, निर्माण की वैधता और दर्ज मुकदमों की जांच को लेकर क्या कदम उठाता है।


