उत्तराखंड पंचायती चुनाव में देरी पर उठे सवाल

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उत्तराखंड पंचायती चुनाव में देरी पर उठे सवाल, हाईकोर्ट की सख्ती — गोपाल सिंह देव ने जताई नाराजगी

पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष ताड़ीखेत ने चुनाव आयोग और सरकार पर साधा निशाना

रिपोर्टर बलवंत सिंह रावत 

रानीखेत/ताड़ीखेत। उत्तराखंड में पंचायती चुनावों को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 2019 के संशोधित पंचायती राज अधिनियम को लागू करने के लिए माननीय उच्च न्यायालय को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ रहा है, जो व्यवस्था की गंभीर असफलता को दर्शाता है।

पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष ताड़ीखेत, गोपाल सिंह देव ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के इस सबसे बड़े पर्व को मज़ाक बना दिया गया है। चुनाव आयोग की निष्क्रियता और बार-बार की जा रही देरी से आम जनता का भरोसा टूट रहा है।

गोपाल सिंह देव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था न होकर सरकार की कठपुतली के रूप में काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “लगातार नौ माह की तैयारी के बावजूद चुनाव प्रक्रिया को टालना यह दर्शाता है कि भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को फायदा पहुँचाने के लिए संवैधानिक नियमों को ताक पर रख रही है। यह सरकार की बड़ी प्रशासनिक विफलता है।”

उन्होंने आगे कहा कि जब न्यायपालिका को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़े तो यह स्पष्ट संकेत है कि कार्यपालिका और चुनाव आयोग अपने दायित्वों का निर्वहन सही तरीके से नहीं कर पा रहे हैं।

गोपाल सिंह देव ने मांग की कि सरकार और चुनाव आयोग तुरंत स्थिति स्पष्ट करें और संशोधित अधिनियम के तहत पारदर्शी और निष्पक्ष पंचायती चुनाव सुनिश्चित करें, ताकि गांवों में लोकतंत्र की असली जड़ें मजबूत हो सकें।

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