हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में ‘मौत का तांडव’! RTI में खुलासा- 3 साल में 6000 से अधिक मौतें
हल्द्वानी। कुमाऊं और पर्वतीय क्षेत्रों की लाइफलाइन माने जाने वाले डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से 2025 के बीच अस्पताल में इलाज के दौरान 6084 से अधिक मरीजों की मौत दर्ज की गई है। इस खुलासे के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा जिलाधिकारी नैनीताल को सौंपे गए पत्र में दावा किया गया है कि अस्पताल में इतनी बड़ी संख्या में मौतों के पीछे खराब स्वास्थ्य व्यवस्था, आधुनिक मशीनों और उपकरणों की कमी तथा विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी प्रमुख कारण हैं। पत्र में कहा गया है कि कुमाऊं और पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले गरीब व मध्यम वर्गीय लोग बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर यहां पहुंचते हैं, लेकिन अव्यवस्थाओं के कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें
सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय लोगों ने प्रशासन से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं—
अस्पताल में हुई मौतों के कारणों की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
सुशीला तिवारी अस्पताल का उच्चीकरण कर इसे एम्स की तर्ज पर विकसित किया जाए, ताकि पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।
अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और खराब पड़ी मशीनों को जल्द से जल्द ठीक कराया जाए।
15 दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन की चेतावनी
क्षेत्रीय जनता की ओर से नीरज तिवारी, कुलदीप तड़ियाल समेत अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो कुमाऊं की जनता और सामाजिक संगठन मिलकर बड़ा जन आंदोलन शुरू करेंगे।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
इस संबंध में भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि राज्यपाल और मुख्यमंत्री उत्तराखंड को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

