द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संगठन द्वाराहाट ने सरकार के शिक्षा संबंधी दावों को पूरी तरह भ्रामक बताया है। संगठन के अध्यक्ष ललित पालीवाल ने कहा कि मार्च तक सभी विद्यालयों में पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अप्रैल का दूसरा सप्ताह शुरू होने के बावजूद अभी तक सभी विषयों की किताबें स्कूलों तक नहीं पहुंची हैं।
उन्होंने बताया कि छात्रों को मिलने वाली निशुल्क गणवेश, जूते और बैग भी समय पर उपलब्ध नहीं हो पाते हैं, जिससे आधा सत्र बीत जाने के बाद ही सामग्री मिलती है। वहीं, कई विद्यालयों में लंबे समय से चावल उपलब्ध न होने के कारण शिक्षकों को स्वयं मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
पालीवाल ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 से शिक्षकों का एरियर भुगतान लंबित है। साथ ही 2022 में विद्यालय सौंदर्यीकरण के लिए कराए गए कार्यों का भुगतान भी अब तक नहीं हुआ है, जिससे शिक्षकों की छवि पर असर पड़ रहा है और दुकानदारों का बकाया बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पहले विद्यालयों को प्रतिवर्ष ₹10,000 की धनराशि मिलती थी, जिसे घटाकर ₹5,000 कर दिया गया है।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि विद्यालय कोटीकरण में अधिकारियों द्वारा मनमानी की जा रही है। एक ओर अप्रैल में प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी (एसआईआर) में लगा दिया गया है, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।
इसके अलावा, शिक्षकों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल लंबे समय से लंबित हैं, जबकि हर महीने 600 से 1000 रुपये की कटौती की जा रही है। वर्ष 2024 में सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों के प्रकरण भी अब तक लंबित हैं और उनकी धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है।
पालीवाल ने कहा कि 2022 से उप शिक्षा अधिकारी का पद रिक्त होने के कारण कई महत्वपूर्ण प्रकरण अटके हुए हैं। उन्होंने सरकार से शीघ्र समस्याओं के समाधान की मांग की है, अन्यथा संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

